लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को कहा कि स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव संतुलित और पौष्टिक आहार से तैयार होती है। बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों के बीच लोगों को भोजन की गुणवत्ता, पोषण और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि केवल स्वाद और सुविधा के लिए ऐसे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आज तेजी से बदलती जीवनशैली के कारण लोगों की भोजन संबंधी आदतों में भी बड़ा बदलाव आया है। व्यस्त दिनचर्या, बाहर का खाना, पैकेज्ड फूड और अधिक तेल-मसाले वाले खाद्य पदार्थों का सेवन आम होता जा रहा है। ऐसे में यह जरूरी है कि लोग अपने दैनिक भोजन में पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करें और खानपान को केवल स्वाद तक सीमित न रखें।

उन्होंने कहा कि संतुलित भोजन का मतलब केवल पेट भरना नहीं है, बल्कि शरीर को जरूरी पोषण उपलब्ध कराना भी है। अनाज, दालें, हरी सब्जियां, फल, दूध और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन का नियमित हिस्सा बनाना चाहिए। इसके साथ ही पानी की पर्याप्त मात्रा और साफ-सफाई का ध्यान रखना भी स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी है।

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि तत्काल स्वाद के लिए अधिक तला-भुना, ज्यादा नमक, चीनी और वसा वाले खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। ऐसी आदतें लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकती हैं। इसलिए लोगों को भोजन चुनते समय उसके स्वाद के साथ उसकी पौष्टिकता पर भी ध्यान देना चाहिए।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए परिवार स्तर से ही अच्छी खानपान की आदतें विकसित करनी होंगी। बच्चों को कम उम्र से ही पौष्टिक भोजन के महत्व के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। यदि परिवार में संतुलित भोजन की आदत होगी तो इसका सकारात्मक असर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लोगों में फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड का चलन बढ़ा है। इन खाद्य पदार्थों का कभी-कभार सेवन अलग बात है, लेकिन नियमित रूप से इन पर निर्भर रहना उचित नहीं है। घर का ताजा और संतुलित भोजन स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर विकल्प है।

मौर्य ने भोजन की स्वच्छता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पौष्टिक भोजन तभी लाभकारी हो सकता है, जब उसकी तैयारी और रखरखाव में साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जाए। दूषित भोजन और अस्वच्छ पानी कई बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसलिए घर, होटल, ढाबे और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता के मानकों का पालन जरूरी है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। कई बार पर्याप्त भोजन उपलब्ध होने के बावजूद संतुलित पोषण नहीं मिल पाता, क्योंकि खाने की थाली में जरूरी तत्व शामिल नहीं होते। ऐसे में लोगों को यह समझना होगा कि किस उम्र और परिस्थिति में किस प्रकार का भोजन अधिक लाभकारी है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और युवाओं की पोषण संबंधी जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए भोजन का चयन शरीर की आवश्यकता के अनुसार किया जाना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के आहार में विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है, क्योंकि इस समय मिलने वाला पोषण भविष्य के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।

उन्होंने कहा कि भोजन की गुणवत्ता का सीधा संबंध व्यक्ति की कार्यक्षमता से भी है। पौष्टिक भोजन शरीर को ऊर्जा देता है और दैनिक जीवन में सक्रिय रहने में मदद करता है। सही खानपान से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर रहती है।

मौर्य ने कहा कि केवल भोजन ही नहीं, बल्कि नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और संतुलित दिनचर्या भी अच्छे स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। यदि व्यक्ति पौष्टिक भोजन के साथ शारीरिक गतिविधि को भी अपने जीवन में शामिल करता है तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

उपमुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे पैकेज्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय उनके लेबल को भी ध्यान से पढ़ें। खाद्य पदार्थ में मौजूद चीनी, नमक, वसा और अन्य तत्वों की जानकारी देखकर ही उसका चयन करना बेहतर है। इससे लोग अपने खानपान को अधिक जागरूक तरीके से नियंत्रित कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही मजबूत समाज और राज्य के विकास में बेहतर योगदान दे सकते हैं। बीमारी से बचाव के लिए उपचार से पहले सही जीवनशैली अपनाना अधिक महत्वपूर्ण है। संतुलित आहार ऐसी ही जीवनशैली का आधार है।

मौर्य ने कहा कि लोगों को मौसमी फल और सब्जियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थ अक्सर आसानी से मिल जाते हैं और उनका नियमित सेवन शरीर के लिए फायदेमंद हो सकता है। अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की तुलना में ताजा भोजन को प्राथमिकता देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार भी पोषण और स्वास्थ्य को लेकर विभिन्न स्तरों पर जागरूकता कार्यक्रम चलाती है, लेकिन इन प्रयासों की सफलता तभी संभव है जब आम लोग भी अपनी दैनिक आदतों में बदलाव करें। परिवार और समाज दोनों स्तरों पर पौष्टिक भोजन को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करनी होगी।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि स्वस्थ जीवन किसी एक दिन के प्रयास से नहीं बनता, बल्कि यह रोजमर्रा की अच्छी आदतों का परिणाम होता है। यदि लोग संतुलित भोजन, साफ-सफाई और नियमित जीवनशैली को अपनाएं तो कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।

उन्होंने दोहराया कि स्वाद के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। भोजन ऐसा होना चाहिए जो शरीर को ऊर्जा दे, जरूरी पोषण उपलब्ध कराए और लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद करे। बदलती जीवनशैली के बीच संतुलित और पौष्टिक आहार को जीवन का स्थायी हिस्सा बनाना ही बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

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