लखनऊ विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में खराब भोजन को लेकर छात्रों का प्रदर्शन
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर छात्रों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति प्रो. जेपी सैनी की ओर से लगातार निरीक्षण किए जाने के बावजूद मेस की व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं होने का आरोप लगाते हुए बुधवार को नवीन परिसर के कौटिल्य और होमी जहांगीर भाभा छात्रावास के विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
छात्रों ने न्यू कैंपस के गेट नंबर एक को बंद कर धरना दिया और मेस में गुणवत्तापूर्ण तथा स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने की मांग की। प्रदर्शन के कारण परिसर में आने-जाने वाले विद्यार्थियों और कर्मचारियों को भी कुछ समय तक परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का आरोप है कि कौटिल्य और होमी जहांगीर भाभा छात्रावास में परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता लंबे समय से खराब है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को कई बार छात्रावास प्रशासन और विश्वविद्यालय के अधिकारियों के सामने रखा, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका।
विद्यार्थियों के मुताबिक मेस में मिलने वाले भोजन को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। कभी खाने की गुणवत्ता ठीक नहीं होने तो कभी स्वच्छता और भोजन तैयार करने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठते हैं। छात्रों का कहना है कि हॉस्टल शुल्क और मेस शुल्क देने के बावजूद उन्हें अपेक्षित गुणवत्ता का भोजन नहीं मिल पा रहा है।
छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कई बार निरीक्षण किए गए हैं। कुलपति प्रो. जेपी सैनी भी छात्रावासों और मेस की स्थिति का जायजा ले चुके हैं। इसके बाद व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए गए, लेकिन विद्यार्थियों का कहना है कि इन निर्देशों का असर लंबे समय तक दिखाई नहीं दिया।
बुधवार को नाराज छात्र बड़ी संख्या में न्यू कैंपस के गेट नंबर एक पर जमा हुए। विद्यार्थियों ने गेट बंद कर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि जब तक भोजन की गुणवत्ता में ठोस सुधार नहीं किया जाता, तब तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने मांग की कि मेस में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाए। रसोई की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए और भोजन तैयार करने से लेकर परोसने तक सभी स्तरों पर स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
छात्रों ने यह भी मांग रखी कि मेस व्यवस्था की नियमित निगरानी के लिए एक प्रभावी प्रणाली बनाई जाए। इसमें विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, ताकि भोजन से जुड़ी किसी समस्या की जानकारी तुरंत विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंच सके।
विद्यार्थियों का कहना है कि हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के लिए मेस का भोजन बेहद महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी दूसरे जिलों और राज्यों से पढ़ाई के लिए लखनऊ आते हैं और रोजाना भोजन के लिए पूरी तरह छात्रावास की मेस पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में खराब भोजन उनके स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों को प्रभावित कर सकता है।
छात्रों का कहना है कि कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें करने के बावजूद समस्या कुछ दिनों के लिए ठीक होती है और उसके बाद फिर वही स्थिति बनने लगती है। यही कारण है कि इस बार छात्रों ने धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।
कौटिल्य और होमी जहांगीर भाभा छात्रावास के विद्यार्थियों ने प्रशासन से मेस संचालकों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की। छात्रों का कहना है कि यदि निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप भोजन नहीं दिया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए छात्रों का विरोध चिंता का विषय बन गया है। छात्रावासों की व्यवस्था सीधे विद्यार्थियों के दैनिक जीवन से जुड़ी होती है। ऐसे में भोजन को लेकर बार-बार शिकायतें सामने आने से प्रशासन पर समस्या का स्थायी समाधान निकालने का दबाव बढ़ गया है।
छात्रों ने मांग की कि खाने का मेन्यू भी विद्यार्थियों की जरूरत और पोषण को ध्यान में रखकर तैयार किया जाए। भोजन में पर्याप्त मात्रा में दाल, सब्जी और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध हो तथा निर्धारित मेन्यू का नियमित पालन किया जाए।
विद्यार्थियों ने कहा कि केवल निरीक्षण करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। निरीक्षण में सामने आने वाली कमियों पर समयबद्ध कार्रवाई भी जरूरी है। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को लगातार निगरानी करनी चाहिए।
छात्रों के विरोध के बीच परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर रखी गई। गेट बंद किए जाने से विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने यह चुनौती रही कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण बना रहे और अन्य विद्यार्थियों की गतिविधियां ज्यादा प्रभावित न हों।
छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य विश्वविद्यालय की व्यवस्था बाधित करना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही समस्या पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी शिकायतों पर पहले ही प्रभावी कार्रवाई हो जाती तो उन्हें प्रदर्शन की जरूरत नहीं पड़ती।
मेस के भोजन की गुणवत्ता का मुद्दा केवल स्वाद से नहीं बल्कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य से भी जुड़ा है। छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थी प्रतिदिन सुबह, दोपहर और शाम का भोजन मेस में ही करते हैं। ऐसे में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और साफ-सफाई में किसी तरह की लापरवाही स्वास्थ्य संबंधी परेशानी पैदा कर सकती है।
विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मेस व्यवस्था की पूरी समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि भोजन बनाने की सामग्री की खरीद, उसका भंडारण, रसोई की स्वच्छता और खाने की गुणवत्ता सभी स्तरों पर निगरानी होनी चाहिए।
कुलपति के निरीक्षण के बावजूद समस्या दोबारा सामने आने से छात्रों ने संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि निर्देश जारी होने के बाद उनका पालन हुआ या नहीं, इसकी समीक्षा होना जरूरी है।
फिलहाल कौटिल्य और होमी जहांगीर भाभा छात्रावास के छात्रों का विरोध विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने नई चुनौती बन गया है। विद्यार्थियों ने साफ कहा है कि उन्हें स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन चाहिए और इस मामले में केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा।
अब नजर इस बात पर है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और मेस व्यवस्था को सुधारने के लिए किस तरह की स्थायी व्यवस्था लागू की जाती है।