रामपुर: सपा नेता मोहम्मद आजम खान के मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। करीब दस साल बाद विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित सड़क प्रशासनिक कार्रवाई के बाद मुक्त हुई है। इसके बाद प्रशासन ने छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए उसी स्थान पर एक काउंसलिंग सेंटर स्थापित कर दिया है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर शुरू किए गए इस काउंसलिंग सेंटर का उद्देश्य जौहर विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करना और उन्हें शैक्षणिक विकल्पों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना है। प्रशासन की ओर से यहां अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी गई है, जो छात्रों के सवालों का जवाब देंगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें दूसरे शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने में सहायता करेंगी।
इस काउंसलिंग सेंटर की जिम्मेदारी जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अंजलि और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. जागृति मदान ढींगरा को दी गई है। दोनों अधिकारी छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझेंगी और उन्हें आगे की पढ़ाई को लेकर उचित मार्गदर्शन देंगी।
प्रशासन का कहना है कि छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो, इसके लिए यह पहल की गई है। यदि कोई छात्र या छात्रा किसी अन्य संस्थान में प्रवेश लेना चाहता है तो उसे जरूरी प्रक्रिया और विकल्पों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
दरअसल, जौहर विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। सिंगनखेड़ा में आजम खान ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद मुख्य गेट का निर्माण लोक निर्माण विभाग की करीब 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क पर कर लिया था। इस सड़क को लेकर प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन के बीच विवाद सामने आया था।
जानकारी के अनुसार, मई 2016 में इस सड़क के चौड़ीकरण के लिए त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत 13 करोड़ रुपये से अधिक का बजट खर्च किया गया था। बाद में सड़क और विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वार को लेकर कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया चली।
अब प्रशासन द्वारा सड़क को मुक्त कराने के बाद वहां काउंसलिंग सेंटर स्थापित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य किसी भी छात्र की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने देना है। प्रशासन छात्रों को शिक्षा से जुड़े विकल्पों की जानकारी उपलब्ध कराएगा, ताकि उन्हें भविष्य की योजनाएं बनाने में परेशानी न हो।
जौहर विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के बीच भी इस सेंटर को लेकर चर्चा है। कई छात्र अपनी पढ़ाई, प्रवेश और भविष्य की संभावनाओं को लेकर जानकारी हासिल कर सकते हैं। प्रशासन का प्रयास है कि छात्रों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
गौरतलब है कि आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और जौहर विश्वविद्यालय उनके प्रमुख ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल रहा है। विश्वविद्यालय को लेकर समय-समय पर राजनीतिक और कानूनी विवाद सामने आते रहे हैं।
फिलहाल प्रशासन ने छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए काउंसलिंग सेंटर की शुरुआत की है। आने वाले दिनों में यह केंद्र छात्रों को शिक्षा से जुड़े फैसले लेने में कितना मददगार साबित होता है, इस पर सभी की नजर रहेगी। प्रशासन का कहना है कि विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे भी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।