त्रिपुरा: एक वरिष्ठ अधिकारी ने 19 अक्टूबर को बताया कि त्रिपुरा सरकार ने उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार करने के लिए, चालू वित्त वर्ष में 6,000 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम (ताड़ के तेल) की खेती करने का लक्ष्य रखा है।
कृषि एवं किसान कल्याण और बागवानी विभाग के निदेशक पी.बी. जमातिया ने पीटीआई को बताया कि इस लक्ष्य में से 4,700 हेक्टेयर क्षेत्र में पहले ही ऑयल पाम की खेती शुरू हो चुकी है, जबकि बाकी 1,300 हेक्टेयर क्षेत्र को मार्च 2027 तक कवर कर लिए जाने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि राज्य में अभी 10,000 से अधिक किसान ऑयल पाम की खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस फसल के बारे में जागरूकता फैला रही है, खासकर पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच, जहाँ इससे बेहतर आर्थिक लाभ मिल सकता है।
जमातिया ने बताया कि राज्य सरकार निजी संस्थाओं द्वारा चलाई जा रही नर्सरियों के माध्यम से ऑयल पाम के पौधे मुफ्त में उपलब्ध करा रही है। साथ ही, किसानों को इस खेती के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार भी उन्हें चार साल तक आर्थिक सहायता दे रही है।
इसके संभावित फायदों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि रबर के बागानों के विपरीत, ऑयल पाम की खेती के साथ किसान अन्य फसलें भी उगा सकते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय हो सकती है।
उन्होंने बताया कि एक ऑयल पाम के पौधे को तैयार होने में लगभग चार साल लगते हैं और यह 30 साल तक पैदावार दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने ऑयल पाम के बीजों के लिए एक निश्चित कीमत (एश्योर्ड प्राइस) की घोषणा की है, ताकि किसानों को उचित मुनाफा मिल सके।
जमातिया ने कहा कि त्रिपुरा की कृषि-जलवायु परिस्थितियां ऑयल पाम की खेती के लिए बहुत उपयुक्त हैं। विभाग की योजना अगले वित्त वर्ष, 2027-28 में इस फसल के तहत आने वाले क्षेत्र को बढ़ाकर 10,000 हेक्टेयर करने की है।
राज्य सरकार ने उत्तरी त्रिपुरा जिले के नलकाटा और पश्चिमी त्रिपुरा जिले के बेलबारी में ऑयल पाम प्रोसेसिंग कारखाने स्थापित करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं।
जमातिया ने बताया कि ये दोनों इकाइयां दिसंबर 2027 के अंत तक काम करना शुरू कर देंगी। उन्होंने कहा कि जब ये कारखाने चालू हो जाएंगे, तो स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग की सुविधा होने से किसानों को काफी फायदा होगा।