अगरतला: त्रिपुरा के धलाई जिले में अंबासा के पास कथलचारी के नकुलपाड़ा इलाके में पेड़ काटने को लेकर ग्रामीणों और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच हुई झड़प के बाद प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। घटना में वनकर्मियों पर ग्रामीणों की ओर से हमला किए जाने और वन विभाग की तरफ से कथित तौर पर गोली चलाए जाने के आरोप सामने आए हैं। इसके बाद नाराज ग्रामीणों ने असम-अगरतला राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया।

इस घटनाक्रम के बीच वन विभाग से जुड़े लिखित आश्वासन/दस्तावेज को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। साथ ही सोशल और राजनीतिक हलकों में इसकी तुलना हाल ही में अगरतला में TET पास नौकरी के उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई से की जा रही है। हालांकि दोनों घटनाओं की परिस्थितियां और कानूनी पहलू अलग-अलग हैं।
पेड़ काटने को लेकर शुरू हुआ विवाद
रिपोर्ट के मुताबिक वन विभाग के कर्मचारियों को कथलचारी गांव के अंतर्गत नकुलपाड़ा इलाके में पेड़ काटे जाने की सूचना मिली थी। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कथित पेड़ कटाई को रोकने की कोशिश की। इसी दौरान कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जिसने बाद में झड़प का रूप ले लिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि टकराव के दौरान वन विभाग की ओर से तीन राउंड फायरिंग की गई। दूसरी ओर झड़प में वनकर्मी चिरंजीत देबबर्मा के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। घटना के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए और राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित हो गया।
प्रशासन के रवैये पर उठे सवाल
घटना के बाद प्रदर्शनकारियों और स्थानीय लोगों की मांगों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बातचीत हुई। इसी संदर्भ में वन विभाग की ओर से दिए गए लिखित आश्वासन को लेकर चर्चा शुरू हुई है। सवाल यह उठाया जा रहा है कि तनावपूर्ण स्थिति और सड़क जाम के बाद प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन देने की प्रक्रिया अपनाई गई, जबकि कुछ दिन पहले नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे TET पास अभ्यर्थियों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा था।
यह तुलना मुख्य रूप से प्रशासन द्वारा अलग-अलग प्रदर्शनों से निपटने के तरीके को लेकर की जा रही है। हालांकि कथलचारी की घटना और TET अभ्यर्थियों के आंदोलन की परिस्थितियां एक जैसी नहीं थीं।
TET अभ्यर्थियों पर चला था वाटर कैनन
अगरतला में 24 सितंबर को वर्ष 2024 की TET-I और TET-II परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों ने भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। करीब 1,856 योग्य उम्मीदवार नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।
शिक्षा भवन के पास प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। करीब 100 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर एडी नगर पुलिस लाइंस ले जाए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी। अभ्यर्थियों ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया, जबकि पुलिस की ओर से कहा गया कि व्यस्त सड़क खाली कराने और संभावित संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए कार्रवाई की गई।
कार्रवाई की तुलना पर मुख्यमंत्री ने दिया था जवाब
TET अभ्यर्थियों पर हुई कार्रवाई के बाद अलग-अलग आंदोलनों से प्रशासन के व्यवहार की तुलना भी की गई थी। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने इस तरह की तुलना पर कहा था कि अलग-अलग आंदोलनों को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि प्रत्येक मामले के अपने कानूनी और प्रशासनिक पहलू होते हैं।
TET अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में SFI, DYFI और TYF जैसे संगठनों ने भी प्रदर्शन किया। इन संगठनों ने आरोप लगाया कि नौकरी मांग रहे योग्य अभ्यर्थियों के साथ प्रशासन ने कठोर व्यवहार किया। पुलिस ने हालांकि अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था और सड़क खाली कराने से जोड़ा।
कथलचारी मामले की जांच पर नजर
कथलचारी की घटना में फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि झड़प कैसे शुरू हुई, गोली किस परिस्थिति में चलाई गई और दोनों पक्षों की भूमिका क्या थी। ग्रामीणों के आरोप और वन विभाग से जुड़े घटनाक्रम की जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
वहीं TET उम्मीदवारों के मामले में भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की मांग बनी हुई है। दोनों घटनाओं को लेकर हो रही तुलना अब प्रशासन की ओर से अलग-अलग प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था की परिस्थितियों से निपटने के तरीके पर सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गई है।
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