त्रिपुरा को मिली बड़ी सौगात, CM माणिक साहा ने रखी बिजली परियोजना की आधारशिला
त्रिपुरा : राजधानी अगरतला में बिजली आपूर्ति को आधुनिक, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने गुरुवार को अगरतला अंडरग्राउंड केबलिंग परियोजना की आधारशिला रखी। इस परियोजना के तहत शहर में बिजली की मौजूदा ओवरहेड लाइनों को भूमिगत केबल नेटवर्क से बदला जाएगा। इससे तेज आंधी, भारी बारिश और पेड़ गिरने के कारण होने वाली बिजली कटौती में कमी आने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना अगरतला के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के साथ शहर को आधुनिक स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।अगरतला, 29 अक्टूबर 2026। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने गुरुवार को अगरतला के बर्दोवाली हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अंडरग्राउंड केबलिंग परियोजना का शिलान्यास किया। इसी अवसर पर प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत यूटिलिटी-लेड एग्रीगेशन (ULA) मॉडल की भी शुरुआत की गई।कार्यक्रम में राज्य के बिजली मंत्री रतन लाल नाथ, अगरतला नगर निगम के मेयर दीपक मजूमदार, विधानसभा उपाध्यक्ष रामप्रसाद पाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बिजली वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने, आपूर्ति में बाधाओं को कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है।
अगरतला में भूमिगत होंगी बिजली की लाइनें
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बताया कि इस परियोजना के माध्यम से अगरतला नगर निगम क्षेत्र में मौजूदा बिजली वितरण लाइनों को चरणबद्ध तरीके से भूमिगत किया जाएगा।इसके अंतर्गत हाई टेंशन (HT) और लो टेंशन (LT) बिजली लाइनों को आधुनिक भूमिगत नेटवर्क में बदला जाएगा।परियोजना का मुख्य उद्देश्य बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाना और मौसम संबंधी कारणों से होने वाली बाधाओं को कम करना है।मुख्यमंत्री के अनुसार, तेज हवाओं और तूफान के दौरान पेड़ गिरने से बिजली के तार टूट जाते हैं, जिसके कारण कई क्षेत्रों में आपूर्ति बाधित होती है।भूमिगत केबल प्रणाली विकसित होने के बाद ऐसी घटनाओं से होने वाले व्यवधान कम होने की संभावना है।
1,437 करोड़ रुपये की परियोजना, 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, अगरतला अंडरग्राउंड केबलिंग परियोजना के लिए लगभग 1,437 करोड़ रुपये का आवंटन बताया गया है।परियोजना का काम तीन एजेंसियों को सौंपा गया है और इसे वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।वहीं, बिजली मंत्री रतन लाल नाथ ने परियोजना की अनुमानित लागत 1,151 करोड़ रुपये बताई। उनके अनुसार, इसमें राज्य सरकार के 131 करोड़ रुपये, केंद्र सरकार के 495 करोड़ रुपये और एशियाई विकास बैंक से 525 करोड़ रुपये के ऋण का प्रावधान है।दोनों आंकड़ों में अंतर है। विस्तृत परियोजना लागत का अंतिम आधिकारिक विवरण स्पष्ट होना बाकी है।
स्मार्ट ग्रिड से होगी बिजली नेटवर्क की निगरानी
अंडरग्राउंड केबलिंग परियोजना में स्मार्ट ग्रिड तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा।इस व्यवस्था के तहत बिजली वितरण प्रणाली की वास्तविक समय में निगरानी के लिए आधुनिक कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा।स्मार्ट ग्रिड की मदद से बिजली आपूर्ति में आने वाली तकनीकी खराबियों का पता लगाने और उनकी पहचान करने की प्रक्रिया बेहतर हो सकेगी।इससे बिजली विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में मरम्मत और आपूर्ति बहाली की योजना बनाने में सहायता मिलेगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और कुशल बनाने के लिए आवश्यक है।
सड़कें खोदे बिना केबल बिछाने की तकनीक
परियोजना के निर्माण के दौरान लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए आधुनिक हॉरिजॉन्टल डायरेक्शनल ड्रिलिंग (HDD) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।इस तकनीक के जरिए सड़क को लंबी दूरी तक खोदने के बजाय चुनिंदा स्थानों पर छोटे गड्ढों की सहायता से भूमिगत केबल बिछाई जा सकती है।बिजली मंत्री रतन लाल नाथ ने कहा कि सरकार निर्माण कार्य के दौरान यातायात और स्थानीय निवासियों को होने वाली असुविधा कम करने पर ध्यान देगी।उन्होंने बताया कि आधुनिक बिजली वितरण व्यवस्था विकसित करने के लिए देश और विदेश में अपनाई गई तकनीकों का भी अध्ययन किया गया है।
शहर की सुंदरता और सुरक्षा में होगा सुधार
भूमिगत केबलिंग परियोजना से अगरतला की शहरी सुंदरता में भी बदलाव आने की उम्मीद है।वर्तमान में सड़कों के किनारे और आवासीय इलाकों में बिजली के खंभों तथा तारों का व्यापक नेटवर्क मौजूद है।इनके भूमिगत होने से शहर में खुले तारों की संख्या कम होगी और सार्वजनिक स्थान अधिक व्यवस्थित दिखाई देंगे।इसके अलावा बिजली के टूटे तारों और क्षतिग्रस्त लाइनों से होने वाले हादसों का जोखिम घटाने में मदद मिल सकती है।मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर बिजली व्यवस्था किसी भी शहर के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए जरूरी है।
डेढ़ लाख परिवारों को मिलेगा सौर ऊर्जा का लाभ
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत ULA मॉडल की शुरुआत भी की।इस योजना के पहले चरण में राज्य के 1.5 लाख परिवारों के घरों पर एक किलोवाट क्षमता वाले रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा गया है।योजना के लिए उन परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनकी मासिक बिजली खपत 50 यूनिट से कम है।सरकार का अनुमान है कि इस पहल से राज्य में लगभग 150 मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता विकसित हो सकेगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य कम आय वाले परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना और बिजली खर्च कम करना है।
लाभार्थियों को हर महीने 100 यूनिट मुफ्त बिजली का लक्ष्य
नई सौर ऊर्जा योजना के तहत पात्र परिवारों के घरों में सोलर प्लांट लगाने का खर्च सरकारी सहायता से वहन किया जाएगा।लाभार्थियों को एक हजार रुपये की वापसी योग्य सुरक्षा राशि जमा करनी होगी।प्रत्येक स्थापना के लिए केंद्रीय बिजली मंत्रालय से 33 हजार रुपये की सब्सिडी उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है।शेष राशि राज्य सरकार और संबंधित वित्तीय व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।इस योजना के तहत पात्र परिवारों को लगभग 100 यूनिट बिजली प्रति माह बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध होने की उम्मीद है। वास्तविक लाभ सौर ऊर्जा उत्पादन और बिजली खपत पर निर्भर करेगा।
दस वर्षों तक बिजली निगम करेगा रखरखाव
मुख्यमंत्री ने बताया कि त्रिपुरा राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (TSECL) सोलर प्लांट की स्थापना के बाद शुरुआती दस वर्षों तक उसके रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगा।इसके बाद सोलर प्लांट का स्वामित्व संबंधित लाभार्थी परिवार को हस्तांतरित किया जाएगा।राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को लंबे समय तक बिजली खर्च में राहत मिलेगी।साथ ही सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ने से पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने बिजली क्षेत्र में सुधारों का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में राज्य सरकार ने बिजली के बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया है।इस दौरान नए सबस्टेशन, ट्रांसमिशन और वितरण लाइनें तथा ट्रांसफॉर्मर स्थापित करने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं।सरकार का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारना है।बिजली मंत्री रतन लाल नाथ ने कहा कि आधुनिक बिजली व्यवस्था से उद्योग, कारोबार और घरेलू उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
अगरतला के विकास को मिलेगी नई गति
अंडरग्राउंड केबलिंग और रूफटॉप सोलर परियोजनाओं को त्रिपुरा की ऊर्जा व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।भूमिगत बिजली नेटवर्क से जहां शहरी सुरक्षा और आपूर्ति की विश्वसनीयता बेहतर होने की उम्मीद है, वहीं सौर ऊर्जा योजना से कम आय वाले परिवारों को आर्थिक राहत मिल सकती है।मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक बुनियादी ढांचे, सुरक्षित बिजली आपूर्ति और स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। अब इन परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और लोगों तक इनके लाभ पहुंचने पर विशेष ध्यान रहेगा।