तेलंगाना: भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने मार्च 2027 में होने वाले तेलंगाना विधान परिषद के दो 'ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्रों' द्विवार्षिक चुनावों के लिए मतदाता पंजीकरण की धीमी और अव्यवस्थित प्रक्रिया पर गहरी चिंता जताई है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि चुनाव आयोग के मैदानी अमले की निष्क्रियता, अधिकारियों द्वारा सत्यापन (attestation) के नाम पर खड़ी की गई बाधाओं, तकनीकी अड़चनों और बहुत कम समय दिए जाने के कारण, लाखों पात्र स्नातकों का वोट देने का मौलिक अधिकार छिनने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
सोमवार को BRS के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) सी. सुदर्शन रेड्डी से मुलाकात की और उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल में पूर्व मंत्री और विधायक तलसानी श्रीनिवास यादव, विधायक कलेरू वेंकटेश, MLC डॉ. दासोजू श्रवण कुमार और MLC सुरभि वाणी देवी के साथ-साथ BRS के कई अन्य प्रमुख नेता और प्रतिनिधि शामिल थे। BRS ने महबूबनगर-रंगा रेड्डी-हैदराबाद और वारंगल-खम्मम-नलगोंडा निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता पंजीकरण में आई भारी गिरावट पर चिंता व्यक्त की।
साल 2021 के चुनावों में इन दो निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 10.36 लाख मतदाता पंजीकृत थे, जबकि अब तक केवल 5,23,758 आवेदन ही प्राप्त हुए हैं (जो 2021 के मतदाताओं का मात्र 50.56% है)। पिछले छह वर्षों में हजारों नए स्नातक सामने आए हैं, इसके बावजूद आवेदनों की संख्या घटकर लगभग आधी रह जाना, प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
पार्टी ने कहा कि वर्तमान दैनिक दर (18,700 आवेदन प्रतिदिन) के हिसाब से, 6 नवंबर तक कुल आवेदनों की संख्या केवल 7.7 लाख के आसपास ही पहुंच पाएगी, जो 2021 के मतदाताओं का मुश्किल से 74% है। BRS ने बताया कि प्राप्त 5.23 लाख आवेदनों में से 94.72% (यानी 4,96,112 आवेदन) अभी भी बिना मैदानी सत्यापन (field verification) के यूं ही पड़े हुए हैं। महबूबनगर-रंगा रेड्डी-हैदराबाद निर्वाचन क्षेत्र में, लंबित आवेदनों की दर चिंताजनक रूप से 97.91% है (2,29,937 आवेदनों में से 2,25,133 आवेदन अभी भी लंबित हैं)।
पूरे राज्य में अब तक केवल 26,085 आवेदन (4.98%) ही मंजूर किए गए हैं, जो 2021 के कुल मतदाताओं का मात्र 2.52% है। BRS के अनुसार, महबूबनगर-रंगा रेड्डी-हैदराबाद निर्वाचन क्षेत्र में कुल 656 मतदान केंद्र हैं, जिनमें से 25.8% (169 बूथ) हैदराबाद जिले में आते हैं; लेकिन कुल प्राप्त आवेदनों में हैदराबाद जिले का योगदान केवल 11.2% (17,165) रहा है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग IT पेशेवरों और शहरी कर्मचारियों के बीच न्यूनतम जागरूकता पैदा करने में भी विफल रहा है।
विपक्षी दल ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में आवेदनों के खारिज होने का खतरा है। अब तक जिन आवेदनों पर फैसला लिया गया है, उनमें से 5.71% आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। अगर यही रुझान लंबित आवेदनों में भी जारी रहता है, तो 28,000 से अधिक वैध आवेदन खारिज हो सकते हैं। पार्टी ने पंजीकरण की धीमी गति के मुख्य कारण बताए हैं। सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश न होने के कारण, राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officers) प्रमाणपत्रों को सत्यापित (authenticate) करने से इनकार कर रहे हैं।
सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते थक चुके कई स्नातक (graduates) अब पंजीकरण कराने का विचार ही छोड़ रहे हैं। कई आवेदकों को यह नहीं पता है कि ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी, राजपत्रित अधिकारियों द्वारा सत्यापित दस्तावेजों की भौतिक प्रतियां (physical copies) तहसीलदार या AERO कार्यालय में जमा करानी होती हैं। अधिकारी भी आवेदकों को इस बारे में सक्रिय रूप से सूचित करने में विफल रहे हैं। CEO को बताया गया कि विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाता सूची में संशोधन के समय की तरह, स्नातक पंजीकरण के लिए BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) को कोई विशेष लक्ष्य, घर-घर जाकर सत्यापन करने की जिम्मेदारी या सहायता डेस्क (help desk) नहीं दी गई है।
BRS ने मांग की है कि पंजीकरण की मौजूदा समय-सीमा (6 नवंबर) को कम से कम एक महीने के लिए बढ़ाया जाए। साथ ही, व्यापक प्रचार करके यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मतदाता अभी भी 'दावे और आपत्तियों' (claims and objections) की अवधि (25.11.2026 – 10.12.2026) के दौरान और 'निरंतर अद्यतन' (continuous updation) प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। BRS ने कहा कि मुख्य सचिव (CS) को तुरंत एक निर्देश जारी करना चाहिए, जिसमें सभी राजपत्रित अधिकारियों (Gazetted Officers) को निर्देश दिया जाए कि वे बिना किसी मनाही के और निःशुल्क मूल प्रमाणपत्रों का सत्यापन करें और उनकी फोटोकॉपी को सत्यापित (attest) करें।
पार्टी ने मांग की कि सभी तहसीलदार, MPDO और GHMC सर्कल कार्यालयों के साथ-साथ सरकारी डिग्री कॉलेजों में, सार्वजनिक डिस्प्ले बोर्ड के साथ विशेष 'अटेस्टेशन डेस्क' (सत्यापन डेस्क) बनाए जाएं। डिजीलॉकर (DigiLocker) या NAD के माध्यम से जारी किए गए डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रमाणपत्रों को बिना किसी अतिरिक्त भौतिक सत्यापन (physical attestation) के सीधे स्वीकार किया जाना चाहिए। राज्य विश्वविद्यालयों के डेटाबेस के साथ एकीकरण करके सीधे इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन की सुविधा दी जानी चाहिए। चूंकि स्नातक की डिग्री एक स्थायी योग्यता है, इसलिए 2021 की मतदाता सूची में पहले से शामिल मतदाताओं को अपने शैक्षिक प्रमाणपत्र फिर से जमा करने से छूट दी जानी चाहिए; उनसे केवल 'फॉर्म 18' और वर्तमान निवास प्रमाण मांगा जाना चाहिए।
BRS नेताओं ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग को 'स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों' (Graduates' Constituencies) के मूल उद्देश्य की रक्षा करनी चाहिए, जो विधान परिषद में शिक्षित नागरिकों को एक जागरूक आवाज देने के लिए बनाए गए हैं। पूर्व मंत्री तलसानी श्रीनिवास यादव ने मांग की कि लाखों स्नातकों के मताधिकार की रक्षा के लिए, CEO को उनकी मांगों के चार्टर पर तुरंत सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अधिकारी कार्रवाई करने में विफल रहते हैं, तो BRS स्नातकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जमीनी स्तर पर अपना संघर्ष तेज कर देगी।