हैदराबाद: ह्यूमन राइट्स फ़ोरम (HRF) ने सोमवार को राज्य सरकार से कहा कि वह हैदराबाद के 'स्वच्छ ऑटो', टिपर और ट्रॉली वाले कचरा उठाने के सिस्टम को किसी प्राइवेट कंपनी को सौंपने की योजना को रोके। साथ ही, फ़ोरम ने इस काम पर निर्भर 15,000 कर्मचारियों की आजीविका और सामाजिक सुरक्षा की रक्षा की भी मांग की।

HRF ने कहा कि शहर में कचरा उठाने का यह विकेंद्रीकृत (decentralised) सिस्टम लगभग दो दशकों से चल रहा है। फ़ोरम के अनुसार, पिछली BRS सरकार ने दलित और पिछड़े वर्गों के कर्मचारियों को सब्सिडी पर कचरा ढोने वाले लगभग 4,750 वाहन उपलब्ध कराए थे, जबकि बाद में कर्मचारियों ने अपने पैसे से और वाहन खरीदे।

फ़ोरम का अनुमान है कि अब कर्मचारियों के पास लगभग 10,000 ऑटो, ट्रॉली और अन्य वाहन हैं। वे घरों, दुकानों, होटलों और अन्य जगहों से कचरा इकट्ठा करते हैं और उसे GHMC द्वारा तय की गई जगहों पर पहुंचाते हैं।

HRF के अनुसार, अभी रामकी (Ramky) द्वारा संचालित वाहन इन जगहों से कचरा जवाहरनगर डंपिंग यार्ड तक पहुंचाते हैं। HRF ने कहा, "प्राइवेटाइजेशन के नाम पर जन स्वास्थ्य और सफाई जैसी ज़रूरी सार्वजनिक सेवाओं में लगे कर्मचारियों की आजीविका को नुकसान पहुंचाना बहुत अन्यायपूर्ण होगा।" फ़ोरम ने कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों की भी मांग की।

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