हैदराबाद: तेलंगाना हाई कोर्ट ने सोमवार को BRS MLCs टाटा मधु और एन. नवीन कुमार रेड्डी को नोटिस जारी किए। यह नोटिस पुलिस की उस याचिका पर जारी किया गया जिसमें विधानसभा स्पीकर गड्डम प्रसाद कुमार के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में उन्हें मिली ज़मानत रद्द करने की मांग की गई थी। यह मामला SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था।
नोटिस जारी करते हुए हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई बुधवार तक के लिए टाल दी।
मुख्य विपक्षी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (BRS) के इन दो विधायकों को 8 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। उन पर स्पीकर के खिलाफ कथित टिप्पणी करने के लिए FIR दर्ज की गई थी। पुलिस ने उनकी कस्टडी मांगी थी, लेकिन नामपल्ली कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया और उन्हें पर्सनल श्योरिटी पर ज़मानत दे दी।
MLCs ने ये कथित टिप्पणियां 7 सितंबर को की थीं, जब पुलिस ने विधानसभा के प्रवेश द्वार पर BRS विधायकों और MLCs को रोक दिया था। वे मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ आपत्तिजनक नारों वाली काली टी-शर्ट पहने हुए थे।
BRS MLCs को ज़मानत देते समय नामपल्ली कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया था कि उन्हें दोबारा गिरफ्तार न किया जाए।
सैफाबाद पुलिस ने ज़मानत रद्द करने और निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया था।
पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नागेश्वर राव ने कोर्ट को बताया कि MLCs ने संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। कोर्ट को यह भी बताया गया कि उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला किया।
विधानसभा गेट पर 7 सितंबर को हुई घटना के कारण पुलिस ने BRS नेताओं के खिलाफ कई FIR दर्ज कीं और BRS विधायकों को पूरे मॉनसून सत्र के लिए विधानसभा से निलंबित कर दिया गया।
MLC मधु और नवीन रेड्डी के खिलाफ विधानसभा स्पीकर के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) पोलेपल्ली वेंकटेशम की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था।
सैफाबाद पुलिस ने BNS की धारा 352 के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 3(5) और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r), 3(2)(va), 3(2)(vii) के तहत मामला दर्ज किया।
BRS के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामा राव, तेलंगाना विधानसभा में BRS के उप-नेता टी. हरीश राव और पार्टी के कई अन्य विधायकों के खिलाफ भी दो मामले दर्ज किए गए। उन पर महिला पुलिसकर्मियों को ड्यूटी करने से रोकने, अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और उन्हें धमकाने का आरोप है। दूसरी ओर, BRS ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनकी महिला विधायकों के साथ बदसलूकी की, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।
विपक्षी पार्टी ने राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायतें दर्ज कराईं। साथ ही, उन्होंने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को एक ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच के लिए उनके दखल की मांग की।