हैदराबाद: तेलंगाना उच्च न्यायालय ने हाउसिंग बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह 10 दिनों के भीतर अलग-अलग जगहों पर फ्लैट खरीदारों के पक्ष में सेल डीड (बिक्री विलेख) निष्पादित और पंजीकृत करे। इस प्रक्रिया के दौरान, बोर्ड ब्याज के समायोजन (एडजस्टमेंट) पर जोर नहीं देगा और न ही किसी तरह के दंड-ब्याज (पेनल इंटरेस्ट) की मांग करेगा।

देरी से भुगतान पर लगने वाले ब्याज और बिक्री मूल्य (सेल कंसीडरेशन) के साथ उसके समायोजन के मुद्दे पर बाद में विचार किया जाएगा।

न्यायमूर्ति बी. विजयसेन रेड्डी और न्यायमूर्ति गादी प्रवीण कुमार की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश तब दिया, जब वे हाउसिंग बोर्ड के सचिव और एक अन्य अधिकारी द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC), नई दिल्ली द्वारा 19 जून, 2025 को निष्पादन कार्यवाही (एग्जीक्यूशन प्रोसीडिंग्स) के दौरान पारित एक आदेश को चुनौती दी गई थी।

सुनवाई के दौरान, विशेष सरकारी वकील पोट्टिगारी श्रीधर रेड्डी ने कहा कि यदि खरीदार प्रत्येक फ्लैट के लिए 47.85 लाख रुपये की पूरी बिक्री राशि का भुगतान कर देते हैं, तो बोर्ड सेल डीड निष्पादित करने के लिए तैयार है।

खरीदारों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अविनाश देसाई ने इस शर्त का विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी एक स्पष्टीकरण का हवाला दिया।

वकील ने तर्क दिया कि हाउसिंग बोर्ड को 6 प्रतिशत की दर से जो ब्याज देना है—जो कि 16,66,946 रुपये बैठता है—उसे अंतिम बिक्री मूल्य के साथ समायोजित किया जाना चाहिए।

इस समायोजन के बाद, खरीदारों को बोर्ड से लगभग 4,61,946 रुपये मिलने चाहिए।

पीठ ने इस बात पर ध्यान दिया कि हाउसिंग बोर्ड ने NCDRC के समक्ष बार-बार कहा था कि वह चुनौती दिए गए आदेश का पालन करेगा।

पीठ ने यह भी गौर किया कि आयोग ने 24 मई, 2026 के अपने आदेश में बोर्ड के स्थायी वकील द्वारा दिए गए आश्वासन (अंडरटेकिंग) को दर्ज किया था।

इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, उच्च न्यायालय ने बोर्ड को 10 दिनों के भीतर सेल डीड का पंजीकरण पूरा करने का निर्देश दिया।

साथ ही, अदालत ने यह भी आदेश दिया कि सेल डीड के निष्पादन के बाद NCDRC का 19 जून, 2025 का आदेश निलंबित (सस्पेंड) रहेगा। बेंच ने समझौते की धारा 3 के तहत बोर्ड की 14 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज (पेनल इंटरेस्ट) की मांग, और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण के अनुसार ब्याज के समायोजन (एडजस्टमेंट) के लिए खरीदारों के दावे से जुड़े विवाद को खुला छोड़ दिया।

मामले की सुनवाई 18 नवंबर तक के लिए टाल दी गई।

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