हैदराबाद: तेलंगाना सरकार के स्कूल और इंटरमीडिएट शिक्षा को एक ही अथॉरिटी के तहत मिलाने के प्रस्ताव ने पूरे राज्य में एक बहस छेड़ दी है। इससे शिक्षकों, लेक्चररों और अभिभावकों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जिन्हें डर है कि इस कदम से किसी छात्र की पढ़ाई के सबसे अहम पड़ावों में से एक का स्वरूप बदल सकता है।
इस योजना का मकसद नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक की शिक्षा को एक ही प्रशासनिक ढांचे के तहत लाना है। सरकार के मुताबिक, इस कदम का मकसद शासन-प्रशासन को सुव्यवस्थित करना और राज्य की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जैसे सुधारों के अनुरूप बनाना है।
हालांकि, कई शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावक संघों ने इस पर अपनी आपत्तियां जताई हैं। उनका तर्क है कि मौजूदा इंटरमीडिएट व्यवस्था, जिसकी देखरेख अभी तेलंगाना स्टेट बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एजुकेशन (TGBIE) करता है, एक खास चरण के तौर पर काम करती है जो छात्रों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करती है। कई हितधारकों ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में कोई भी बड़ा ढांचागत बदलाव लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श करने की मांग की है।