हैदराबाद। नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं के बाद सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। मुश्किल परिस्थितियों में फंसे लोगों की पहचान करने और उनका इंतजार कर रहे परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए हैदराबाद के एक तकनीकी विशेषज्ञ ने इंसानियत की अनूठी पहल की है। वरिष्ठ सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट अरफात मोहम्मद ने ‘ReuniteIndia.com’ नाम से एक डिजिटल ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इस प्लेटफॉर्म पर नेपाल की आपदा के दौरान लापता हुए 665 लोगों की जानकारी सूचीबद्ध की गई है।

बाढ़ और भूस्खलन के बाद कई इलाकों का संपर्क टूटने तथा संचार सेवाएं प्रभावित होने से लोगों को अपने परिजनों के बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही है। कुछ परिवार लगातार राहत शिविरों, अस्पतालों और प्रशासनिक कार्यालयों से संपर्क कर रहे हैं। ऐसे समय में एक स्थान पर लापता लोगों की जानकारी उपलब्ध कराने वाला यह प्लेटफॉर्म प्रभावित परिवारों और राहत कार्यों से जुड़े लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

अरफात मोहम्मद ने इस प्लेटफॉर्म को केवल नेपाल की प्राकृतिक आपदा के बाद तैयार नहीं किया। इसके पीछे उनकी जिंदगी से जुड़ी एक व्यक्तिगत घटना है। अरफात के एक करीबी दोस्त के पिता डिमेंशिया से पीड़ित थे और एक दिन अचानक घर से लापता हो गए थे। परिवार ने उन्हें खोजने के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन व्यवस्थित जानकारी और तकनीकी माध्यम की कमी के कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।

इस घटना ने अरफात को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने महसूस किया कि किसी व्यक्ति के लापता होने के बाद परिवार के सदस्य मानसिक तनाव के साथ जानकारी के बिखराव की समस्या से भी जूझते हैं। लापता व्यक्ति का विवरण अलग-अलग सोशल मीडिया मंचों, थानों, अस्पतालों और स्थानीय समूहों में साझा किया जाता है, लेकिन सभी सूचनाओं को एक स्थान पर जुटाने का कोई आसान माध्यम नहीं होता। इसी अनुभव से उन्हें सॉफ्टवेयर आधारित मंच बनाने की प्रेरणा मिली।

अरफात ने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए ‘Reunite India’ प्लेटफॉर्म विकसित किया। इसका उद्देश्य लापता लोगों से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित रूप में सूचीबद्ध करना और उन्हें खोज रहे परिवारों की सहायता करना है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान यह आवश्यकता और बढ़ जाती है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग एक साथ विस्थापित हो जाते हैं। संचार व्यवस्था बाधित होने से कई जीवित और सुरक्षित लोग भी अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पाते।

नेपाल में आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद ‘Reunite India’ प्लेटफॉर्म पर 665 लापता लोगों का विवरण सूचीबद्ध किया गया है। एक ही डिजिटल मंच पर इतनी बड़ी संख्या में नाम और जानकारी उपलब्ध होने के कारण परिवारों को अलग-अलग जगह खोजने की परेशानी कम हो सकती है। इससे किसी लापता व्यक्ति को देखने या उसके बारे में जानकारी रखने वाला व्यक्ति भी उपलब्ध विवरण से मिलान कर सकता है।

आपदा के दौरान लोगों का बिछड़ना केवल दुर्गम इलाकों तक सीमित नहीं रहता। राहत और बचाव के दौरान प्रभावित लोगों को अलग-अलग अस्पतालों, शिविरों या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाता है। कई बार घायल या बुजुर्ग व्यक्ति अपना नाम और पता स्पष्ट रूप से नहीं बता पाते। छोटे बच्चे भी परिवार से अलग हो सकते हैं। ऐसी परिस्थिति में एक केंद्रीय सूचना मंच परिवारों और सहायता करने वाले लोगों के बीच संपर्क का माध्यम बन सकता है।

डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति के लापता होने की घटना ने अरफात को यह समझने में मदद की कि बुजुर्गों और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों की खोज में विशेष कठिनाइयां आती हैं। ऐसे व्यक्ति घर का पता, परिजनों का फोन नंबर या अपनी पहचान से जुड़ी जानकारी भूल सकते हैं। उन्हें खोजने के लिए तस्वीर, पहनावा, उम्र और अंतिम बार देखे गए स्थान जैसी जानकारी को तेजी से अधिक लोगों तक पहुंचाना जरूरी होता है।

अरफात की पहल में तकनीक को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है। आमतौर पर सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल व्यापार, मनोरंजन और डिजिटल सेवाओं के लिए किया जाता है, लेकिन ‘Reunite India’ जैसी पहल दिखाती है कि तकनीक आपदा और मानवीय संकट के समय परिवारों की मदद का माध्यम भी बन सकती है। एक वरिष्ठ सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट के रूप में अपने अनुभव का इस्तेमाल अरफात ने जनहित के उद्देश्य से किया है।

हालांकि ऐसे प्लेटफॉर्म की उपयोगिता उसके पास उपलब्ध जानकारी की सटीकता पर निर्भर करती है। लापता लोगों का विवरण दर्ज करते समय नाम, उम्र, तस्वीर और अंतिम स्थान जैसी जानकारियों का सावधानी से सत्यापन जरूरी है। गलत या पुरानी सूचना से परिवारों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है। किसी व्यक्ति के मिल जाने के बाद उसकी स्थिति को तत्काल अपडेट करना भी महत्वपूर्ण होता है, ताकि खोज में लगे संसाधनों का सही इस्तेमाल हो सके।

लापता व्यक्तियों से जुड़े डेटा में निजता और सुरक्षा का ध्यान रखना भी आवश्यक है। संपर्क नंबर, पते और पहचान से संबंधित विवरण का दुरुपयोग न हो, इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उचित सुरक्षा उपाय होने चाहिए। बच्चों और संवेदनशील परिस्थितियों में फंसे लोगों की जानकारी साझा करते समय अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। तकनीकी पहल के साथ जिम्मेदार डेटा प्रबंधन उसकी विश्वसनीयता बढ़ाता है।

नेपाल की आपदा के दौरान सूचीबद्ध 665 लोगों की जानकारी ने इस प्लेटफॉर्म की मानवीय उपयोगिता को सामने लाया है। प्रभावित परिवारों के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने प्रियजनों की सलामती जानना होती है। प्रत्येक सही सूचना किसी परिवार की लंबी प्रतीक्षा समाप्त कर सकती है। दूसरी ओर, जानकारी नहीं मिलने की स्थिति में परिवारों की बेचैनी लगातार बढ़ती जाती है।

‘Reunite India’ सरकारी राहत और बचाव व्यवस्था का विकल्प नहीं है, लेकिन यह उपलब्ध सूचनाओं को जोड़ने में सहयोगी माध्यम बन सकता है। प्रशासन, अस्पताल, राहत संगठन और स्थानीय स्वयंसेवक यदि प्रमाणित जानकारी साझा करें तो लापता लोगों की पहचान और परिजनों से संपर्क की प्रक्रिया को गति मिल सकती है। इसके लिए अलग-अलग एजेंसियों तथा डिजिटल मंचों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा।

अरफात मोहम्मद की यह पहल एक निजी अनुभव से शुरू होकर बड़े मानवीय उद्देश्य तक पहुंची है। दोस्त के पिता के लापता होने पर महसूस की गई असहायता ने उन्हें ऐसा मंच बनाने की प्रेरणा दी, जो अब प्राकृतिक आपदा में बिछड़े सैकड़ों लोगों की जानकारी संभाल रहा है। नेपाल की बाढ़ और भूस्खलन के बीच लापता 665 लोगों को खोजने का यह डिजिटल प्रयास प्रभावित परिवारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आया है।

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