तेलंगाना :  जमीन आवंटन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव (KTR) ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच और तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है। KTR का दावा है कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री के भाई कोंडल रेड्डी से कथित रूप से जुड़ी कंपनी टेसरैक्ट एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड को करीब 200 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन महज 7 करोड़ रुपये में आवंटित कर दी। उन्होंने इस कथित सौदे की प्रक्रिया और कंपनी की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
KTR ने आरोप लगाया कि जिस कंपनी को इतनी बड़ी कीमत वाली जमीन कम राशि में दी गई, उसकी चुकता पूंजी केवल 1 लाख रुपये है। उन्होंने कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी दावा किया कि उसमें एक भी कर्मचारी दर्ज नहीं है। BRS नेता ने सवाल उठाया कि इतनी कम पूंजी और कथित तौर पर बिना कर्मचारियों वाली कंपनी को करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन किस आधार पर आवंटित की गई। उनका कहना है कि सरकार को जमीन आवंटन की पूरी प्रक्रिया, मूल्यांकन और पात्रता से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
विवाद का एक प्रमुख पहलू मुख्यमंत्री के भाई कोंडल रेड्डी से कंपनी के कथित संबंध को लेकर भी है। KTR के मुताबिक, तेलंगाना सरकार पहले यह कह चुकी है कि मुख्यमंत्री के भाई का टेसरैक्ट एडवांस्ड सिस्टम्स से कोई संबंध नहीं है। लेकिन BRS नेता का दावा है कि कोंडल रेड्डी ने अपने LinkedIn प्रोफाइल पर खुद को कंपनी का चेयरमैन बताया है। KTR ने यह भी कहा कि कोंडल रेड्डी कंपनी से जुड़े कार्यक्रमों में अमेरिका के महावाणिज्य दूत के साथ नजर आए हैं। इसी आधार पर उन्होंने सरकार के पुराने दावे पर सवाल खड़े किए हैं।
KTR ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से सीधे जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी अन्य स्टार्टअप के पास भी केवल 1 लाख रुपये की पूंजी हो, तो क्या उसे भी 200 से 300 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन केवल 7 करोड़ रुपये में उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला सिर्फ एक जमीन आवंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और संभावित हितों के टकराव से जुड़े सवाल भी उठते हैं।
BRS नेता ने आरोप लगाया कि तेलंगाना में मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े लोगों को कथित तौर पर बड़ी संख्या में सरकारी ठेके और अन्य लाभ मिले हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। KTR ने कहा कि उनकी पार्टी इस मामले को राज्यपाल, लोकायुक्त और अन्य संबंधित संस्थाओं के समक्ष उठाएगी। जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात भी उन्होंने कही है।
केटी रामाराव ने इस कथित जमीन सौदे की तुलना कर्नाटक के चर्चित MUDA विवाद से भी की। उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना का यह मामला गंभीर है और उनकी पार्टी इसे राजनीतिक रूप से दबने नहीं देगी। KTR ने कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी से भी इस मामले पर जवाब मांगने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि कांग्रेस सरकार पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की बात करती है, तो उसे इस जमीन आवंटन से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
मामले में अब सरकार और संबंधित कंपनी की प्रतिक्रिया पर नजर है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, BRS की ओर से लगाए गए आरोपों का सरकार या टेसरैक्ट एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड की तरफ से विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है। इसलिए जमीन की वास्तविक बाजार कीमत, आवंटन की शर्तें, कंपनी की पात्रता और कोंडल रेड्डी की कंपनी में भूमिका जैसे सवालों पर अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही निकाला जा सकेगा।
तेलंगाना में यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राज्य सरकार पर विपक्ष लगातार पारदर्शिता और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस कथित जमीन आवंटन को लेकर क्या स्पष्टीकरण देती है और क्या पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी या संवैधानिक संस्था से जांच कराई जाती है।
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