SIR को लेकर सियासी घमासान तेज ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट से मांगा हस्तक्षेप
नई दिल्ली। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को ओवैसी ने बताया कि उनकी पार्टी ने एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित एक याचिका और एक पुनर्विचार याचिका दायर की है। इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, कानूनी प्रक्रियाओं और मतदाता सूची से संबंधित निर्धारित फॉर्म में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए गए हैं।ओवैसी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दोनों याचिकाएं उनके वकील एडवोकेट निजाम पाशा के माध्यम से दाखिल की गई हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और यह स्पष्ट कराना है कि चुनाव आयोग ने संबंधित फैसले किस प्रकार लिए थे।
चुनाव आयोग के सामूहिक फैसलों पर उठाए सवाल
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कानून के अनुसार चुनाव आयोग को एक संस्था के रूप में सामूहिक तरीके से काम करना होता है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि आयोग की ओर से लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति से हुए थे या किसी सदस्य ने असहमति दर्ज कराई थी।ओवैसी ने कहा, "हमने अपने वकील एडवोकेट निजाम पाशा के जरिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका और पुनर्विचार याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट जाने के पीछे हमारा उद्देश्य यह है कि कानून के अनुसार चुनाव आयोग को सामूहिक रूप से काम करना होता है।"उन्होंने सवाल उठाया कि यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे या किसी चुनाव आयुक्त ने अलग राय व्यक्त की थी।ओवैसी के मुताबिक, निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े इन सवालों पर न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।
एसआईआर के फैसले पर पुनर्विचार की मांग
ओवैसी की पुनर्विचार याचिका बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए फैसले से संबंधित है।सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व निर्णय में चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया की वैधता को बरकरार रखा था। अब ओवैसी ने इस निर्णय के कुछ पहलुओं पर दोबारा विचार करने की मांग की है।पुनर्विचार याचिका में चुनाव आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया और उससे संबंधित नई जानकारी का उल्लेख किया गया है।ओवैसी ने दलील दी है कि चुनाव आयोग के भीतर निर्णयों पर सहमति और असहमति से जुड़ी परिस्थितियों की न्यायिक जांच जरूरी है।
कानूनी फॉर्म में बदलाव को लेकर आपत्ति
एआईएमआईएम प्रमुख ने मतदाता सूची से संबंधित कानूनी फॉर्म में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाए हैं।उनका कहना है कि चुनाव आयोग द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया में वैधानिक प्रावधानों का पालन किया जाना आवश्यक है।उन्होंने विभिन्न राज्यों के उदाहरणों के माध्यम से एसआईआर प्रक्रिया में कथित खामियों का मुद्दा उठाया हैइससे पहले 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले संशोधित फॉर्म-6 को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की थी।अदालत ने कहा था कि उसने संशोधित फॉर्म-6 को न तो मंजूरी दी है और न ही अस्वीकार किया है।
15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई संभव
बुधवार को ओवैसी की ओर से पेश अधिवक्ता निजाम पाशा ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के सामने याचिका का उल्लेख किया।उन्होंने अनुरोध किया कि इस मामले को एसआईआर से संबंधित अन्य लंबित याचिकाओं के साथ गुरुवार, 15 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।मुख्य न्यायाधीश ने अनुरोध पर विचार करने और संबंधित मामलों के साथ याचिका सूचीबद्ध करने की बात कही।हालांकि, अदालत ने बुधवार को ओवैसी की याचिका में लगाए गए आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया।
मतदान के अधिकार को लेकर जताई चिंता
ओवैसी की याचिका में दावा किया गया है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान संवैधानिक और वैधानिक सुरक्षा उपायों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया है।याचिका में यह आशंका भी जताई गई है कि प्रक्रिया में कथित खामियों के कारण पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूचियों को सटीक और अद्यतन बनाए रखने के लिए विशेष पुनरीक्षण आवश्यक है।आयोग ने अन्य न्यायिक कार्यवाहियों में स्पष्ट किया है कि प्रारूप मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम नहीं होने का अर्थ हर स्थिति में अंतिम रूप से नाम हटाया जाना नहीं है।
विपक्षी दलों ने भी दी है कानूनी चुनौती
एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाले ओवैसी अकेले विपक्षी नेता नहीं हैं।इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के अन्य नेताओं ने भी मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर याचिका दाखिल की थी।इन याचिकाओं में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया, पारदर्शिता और चुनाव आयोग के निर्णयों से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।
कानूनी और राजनीतिक स्तर पर जारी रहेगा विरोध
असदुद्दीन ओवैसी ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी एसआईआर के मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अपनी आपत्तियां उठाती रहेगी।उनका कहना है कि मतदाता सूची और चुनाव आयोग के फैसलों से जुड़े सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर अंतिम निर्णय आना बाकी है। आगामी सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि अदालत किन मुद्दों पर आगे विचार करेगी और चुनाव आयोग से क्या जवाब मांगा जाएगा।