हैदराबाद : 29 अक्टूबर 2026। तेलंगाना में कांग्रेस सरकार और मुख्य विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री केटी रामाराव (KTR) ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेलंगाना की कांग्रेस सरकार जनता से किए गए चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है। केटीआर ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को राहुल गांधी का 'एटीएम कार्ड' बताते हुए राज्य में कथित भ्रष्टाचार, किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता, बेरोजगारी और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को लेकर सरकार से जवाब मांगा है।केटीआर ने 25 अक्टूबर को हैदराबाद स्थित तेलंगाना भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए थे। यह कार्यक्रम खैरताबाद क्षेत्र के अल्पसंख्यक नेता जिब्रान शरीफ के बीआरएस में शामिल होने के अवसर पर आयोजित किया गया था। इस दौरान केटीआर ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने राज्य की जनता से कई बड़े वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें पूरा करने में देरी हो रही है। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादों की जवाबदेही कौन लेगा।केटीआर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में तेलंगाना कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के लिए धन जुटाने का माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देशभर में जवाबदेही और जनता के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन तेलंगाना में उनकी अपनी पार्टी की सरकार पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। बीआरएस नेता ने कहा कि राहुल गांधी को राज्य की जनता के सामने आकर चुनावी वादों और सरकार के कामकाज पर जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस के 420 चुनावी वादों पर उठाए सवाल
केटीआर ने 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले छह गारंटियों, 13 घोषणाओं और कुल 420 वादों को पूरा करने का भरोसा दिया था। उन्होंने दावा किया कि सरकार बनने के एक हजार दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई महत्वपूर्ण घोषणाएं अधूरी हैं।उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस ने छह गारंटियों को सौ दिनों के भीतर लागू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन कई योजनाओं के क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक उनका लाभ पहुंचने की स्थिति को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है।बीआरएस नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व चुनावों के दौरान जनता से बड़े-बड़े वादे करता है, लेकिन सरकार बनने के बाद उन घोषणाओं के प्रति अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाता। उन्होंने राज्य सरकार से सभी चुनावी वादों की प्रगति सार्वजनिक करने की मांग की।
किसानों की आर्थिक सहायता को लेकर सरकार को घेरा
केटीआर ने किसानों से जुड़ी योजनाओं को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली बीआरएस सरकार के कार्यकाल में किसानों को रायथु बंधु योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता दी जाती थी। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान इस सहायता को बढ़ाने का वादा किया था।उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा का पूरा लाभ अभी तक सभी पात्र किसानों को नहीं मिला है। केटीआर ने सरकार से पूछा कि किसानों के लंबित भुगतान कब किए जाएंगे और घोषित सहायता राशि के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति क्या है।उनका कहना था कि कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और किसानों की आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से किसानों के बकाये और अन्य लंबित सहायता का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।हालांकि, केटीआर द्वारा उठाए गए भुगतान संबंधी मुद्दों पर कुल बकाया राशि और लाभार्थियों की अद्यतन आधिकारिक संख्या उपलब्ध रिपोर्टों से स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हुई है।
दो लाख नौकरियों के वादे पर भी उठाए सवाल
किसानों के अलावा केटीआर ने बेरोजगार युवाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं को दो लाख नौकरियां उपलब्ध कराने का वादा किया था। उन्होंने राहुल गांधी के हैदराबाद के अशोक नगर में बेरोजगार युवाओं के साथ हुए संवाद की याद दिलाते हुए पूछा कि उन युवाओं से किए गए आश्वासनों का क्या हुआ।केटीआर ने आरोप लगाया कि रोजगार की उम्मीद में कांग्रेस का समर्थन करने वाले हजारों युवा अब भी सरकारी नौकरियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से भर्ती प्रक्रियाओं, उपलब्ध कराई गई नौकरियों और लंबित पदों का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक करने को कहा।उन्होंने आरोप लगाया कि बेरोजगारी और किसानों की परेशानियों जैसे वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
पेंशन और अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं पर निशाना
बीआरएस नेता ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अल्पसंख्यक कल्याण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आसरा पेंशन की राशि दो हजार रुपये से बढ़ाकर चार हजार रुपये करने का वादा किया था। इसके साथ ही अल्पसंख्यक कल्याण के लिए चार हजार करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा का भी उल्लेख किया।केटीआर ने सरकार से इन घोषणाओं के क्रियान्वयन की जानकारी मांगी। उनका आरोप है कि विभिन्न वर्गों के लिए घोषित योजनाओं को लेकर सरकार की ओर से पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।
मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े कारोबार पर लगाए आरोप
केटीआर ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के परिवार से कथित रूप से जुड़े भूमि सौदों और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कुछ संपत्ति लेनदेन और कारोबारी समझौतों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच तथा संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की।ये आरोप बीआरएस नेता के राजनीतिक दावे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इनके आधार पर किसी भ्रष्टाचार या गैरकानूनी लेनदेन के सिद्ध होने की पुष्टि नहीं होती।कांग्रेस नेता आदि श्रीनिवास ने केटीआर के ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए उनसे अपने दावों के समर्थन में प्रमाण पेश करने को कहा है। वहीं, कांग्रेस नेता मोथा रोहित ने भी केटीआर की भाषा और आरोपों पर आपत्ति जताते हुए बीआरएस के पिछले शासनकाल के कामकाज पर सवाल उठाए।
केंद्र की भाजपा सरकार पर भी साधा निशाना
केटीआर ने अपने संबोधन में केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि केंद्र की भाजपा सरकार की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करती है।उन्होंने कहा कि बीआरएस तेलंगाना के हितों के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में पार्टी के दोबारा सत्ता में आने का विश्वास व्यक्त किया।बीआरएस नेता ने दावा किया कि पिछले शासनकाल में बिजली, पेयजल, बुनियादी ढांचे और कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार उन उपलब्धियों को आगे बढ़ाने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी में अधिक व्यस्त है।
तेलंगाना की राजनीति में बढ़ा आरोप-प्रत्यारोप का दौर
केटीआर के बयानों के बाद राज्य में चुनावी घोषणाओं और सरकार की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। बीआरएस किसानों, बेरोजगार युवाओं, पेंशनधारकों और अन्य वर्गों से जुड़े मुद्दों को उठाकर कांग्रेस सरकार से जवाब मांग रही है।दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं ने बीआरएस के आरोपों पर सवाल उठाते हुए प्रमाण पेश करने की मांग की है। ऐसे में राजनीतिक विवाद का प्रमुख मुद्दा यह है कि चुनाव के समय किए गए वादों को किस हद तक लागू किया गया है और शेष घोषणाओं पर सरकार की आगे की कार्ययोजना क्या है।फिलहाल केटीआर ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी किसानों के लंबित भुगतान, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं के मुद्दे उठाती रहेगी। इन मांगों पर राज्य सरकार का अगला कदम महत्वपूर्ण होगा।
Tags: