तेलंगाना में RRR प्रोजेक्ट विवाद में किसानों का आरोप, कांग्रेस नेताओं की जमीन बचाने के लिए मार्ग बदला गया
hyderabad हैदराबाद: तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद से महत्वाकांक्षी रीजनल रिंग रोड (RRR) परियोजना विवादों में फंसी हुई है। परियोजना शुरू से ही सुर्खियों में रही, लेकिन इस बार किसान और विपक्षी दल इसे लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। पहले किसानों ने इस बात को लेकर प्रदर्शन किया कि उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया गया। अब किसान यह आरोप लगा रहे हैं कि राज्य सरकार ने RRR की दिशा बदल दी है ताकि कांग्रेस नेताओं और उनके सहयोगियों की जमीन सुरक्षित रहे। इस बदलाव को राज्य मंत्रिमंडल ने इस साल जुलाई में मंजूरी दी थी। RRR के दक्षिणी मार्ग की लंबाई पहले 182 किलोमीटर थी, जिसे अब बढ़ाकर 201 किलोमीटर कर दिया गया है। इस बदलाव के कारण परियोजना क्षेत्र में कई नई जमीनें शामिल हो गई हैं और इससे किसानों और स्थानीय निवासियों के हितों पर प्रश्न उठाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि परियोजना के मूल मार्ग में बदलाव करने से ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक योजनाओं पर भी असर पड़ेगा। वहीं, किसानों का कहना है कि उन्हें मुआवजे में हुई कमी और भूमि अधिग्रहण की पारदर्शिता की कमी से गंभीर परेशानियां हो रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मार्ग बदलकर खास वर्गों के हितों की रक्षा की जा रही है। सरकार ने फिलहाल इन आरोपों पर कोई प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, अधिकारी यह कह रहे हैं कि मार्ग में बदलाव केवल तकनीकी और पर्यावरणीय कारणों से किया गया है और किसी की जमीन सुरक्षित रखने का उद्देश्य नहीं था। राज्य में यह परियोजना आर्थिक और परिवहन दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विवाद बढ़ता रहा, तो परियोजना की समयसीमा प्रभावित हो सकती है और इसके निर्माण खर्च में भी बढ़ोतरी हो सकती है। किसानों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को मार्ग बदलने और मुआवजे के मसलों में पूरी पारदर्शिता रखनी चाहिए। जनता और मीडिया इस मुद्दे पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।