Hyderabad.हैदराबाद: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए मोबाइल फोन खरीद में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर तेलंगाना की राजनीति में तनाव बढ़ गया है। इस मामले में आदिवासी कल्याण मंत्री सीतक्का ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और उनकी पार्टी भारत राष्ट्र समिति के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कानूनी नोटिस भेजा है।
मंत्री सीतक्का की ओर से यह नोटिस मानहानि के आरोपों को लेकर भेजा गया है। उनका कहना है कि विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे “फोन घोटाले” के आरोप पूरी तरह निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। नोटिस में दावा किया गया है कि बीआरएस नेताओं ने बिना किसी ठोस सबूत के सरकार और मंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है।
सूत्रों के अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब बीआरएस नेताओं ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए खरीदे गए मोबाइल फोनों की खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप है कि इस खरीद में पारदर्शिता की कमी रही और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल निगरानी और सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई थी।
सीतक्का की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में कहा गया है कि विपक्षी नेताओं ने जानबूझकर गलत जानकारी फैलाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की है। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि आरोपों को वापस नहीं लिया गया और सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी गई, तो आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। बीआरएस नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा है कि वे अपने आरोपों पर कायम हैं और सरकार को सभी सवालों का जवाब देना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि यह मुद्दा जनता के धन और पारदर्शिता से जुड़ा है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराता नजर आ सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। इससे राज्य की सियासत में टकराव की स्थिति और बढ़ सकती है।
वहीं, प्रशासनिक स्तर पर अभी तक इस खरीद प्रक्रिया की विस्तृत जांच को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन राजनीतिक दबाव के बीच इस मामले ने सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है।
फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बीआरएस इस कानूनी नोटिस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या यह मामला अदालत तक पहुंचता है या राजनीतिक स्तर पर ही सुलझाया जाता है।
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