CURE बिल में प्रॉपर्टी की कैपिटल वैल्यू पर आधारित प्रॉपर्टी टैक्स का प्रस्ताव
हैदराबाद: राज्य सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में 'कोर अर्बन रीजन (इंटीग्रेटेड गवर्नेंस) बिल, 2026' पेश किया। इस बिल का मकसद 70 साल पुराने GHMC एक्ट, 1955 की जगह एक नया मेट्रोपॉलिटन गवर्नेंस सिस्टम लाना है।
विधायी मामलों के मंत्री डी. श्रीधर बाबू द्वारा पेश किए गए इस बिल में मौजूदा ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (GHMC) इलाके को तीन म्युनिसिपल कॉरपोरेशन — GHMC, साइबराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन और मल्कजगिरी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन — में बांटने का प्रस्ताव है। ये तीनों 'कोर अर्बन रीजन' (CURE) के तहत आएंगे।
इस प्रस्तावित सिस्टम का मकसद मेट्रोपॉलिटन लेवल की प्लानिंग को डिसेंट्रलाइज्ड सिविक एडमिनिस्ट्रेशन (विकेंद्रीकृत नागरिक प्रशासन) के साथ जोड़ना और तीनों कॉरपोरेशन, सरकारी विभागों और अन्य शहरी अथॉरिटीज के बीच तालमेल बेहतर बनाना है।
सरकार ने कहा कि मौजूदा GHMC एक्ट तब बना था जब हैदराबाद की आबादी करीब 15 लाख थी। इसमें 100 से ज़्यादा ऐसे प्रावधान हैं जो अब बेकार या गैर-ज़रूरी हो गए हैं। शहर और उसके आस-पास के शहरी इलाके में अब लगभग 1.3 करोड़ लोग रहते हैं; आबादी, भौगोलिक विस्तार और आर्थिक गतिविधियों में काफी बढ़ोतरी हुई है।