तेलंगाना: मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने हैदराबाद के मियापुर में 50,000 करोड़ रुपये की कीमत वाली एक अहम ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश की थी। मियापुर में 550 एकड़ ज़मीन पर तेलंगाना सरकार के दावे को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सही ठहराए जाने के एक दिन बाद, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस ज़मीन को अपने कब्ज़े में लें और इसकी घेराबंदी करें।
दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, मुख्यमंत्री ने 23 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को 'ऐतिहासिक' बताया और ज़मीन पर राज्य सरकार के दावे को बरकरार रखने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का धन्यवाद किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर), उनके करीबी सहयोगी और राज्यसभा सांसद दामोदर राव, तथा 'नमस्ते तेलंगाना' के सीएमडी ने व्यवसायी गोल्डस्टोन प्रसाद को मोहरा बनाकर इस ज़मीन को हथियाने की कोशिश की थी।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा, "इस ज़मीन को बचाकर, सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि सार्वजनिक संपत्ति के ये कीमती हिस्से तेलंगाना के लोगों के पास ही रहें। यह राज्य और यहाँ के लोगों के हित में एक बहुत बड़ा फैसला है।" उन्होंने बताया कि जब राज्य में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की सरकार थी, तब विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस पार्टी ने इस ज़मीन को बचाने के लिए तत्कालीन राज्य सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद, राज्य सरकार ने इस मामले में अपना पक्ष रखा और अपने पक्ष में फैसला हासिल किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने अब तक 1.50 लाख करोड़ रुपये की सरकारी ज़मीनों को बचाया है। उन्होंने केसीआर और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा ज़मीन हड़पने के कई मामलों का ज़िक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने ज़मीनों पर कब्ज़ा करने के लिए राजस्व रिकॉर्ड (रेवेन्यू रिकॉर्ड) के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की थी। उन्होंने उन पर रिश्वत के तौर पर लग्ज़री कारें और नकद लेने का भी आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि के. टी. रामा राव (केटीआर) ने भालेराव परिवार के साथ मिलकर आईएमजी (IMG) की ज़मीनों को हथियाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि बीआरएस नेताओं ने कांचा गाचीबोवली और मामिडीपल्ली में भी कीमती सरकारी ज़मीनों पर कब्ज़ा करने की कोशिश की थी, लेकिन कांग्रेस सरकार ने कानूनी लड़ाई लड़कर उन्हें बचा लिया। रेवंत रेड्डी ने कहा कि KTR के साथियों ने गुर्रमगुडा में वन भूमि पर कब्ज़ा करने की कोशिश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस ज़मीन के 'वन भूमि' वाले दर्जे को बरकरार रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि KTR और रायलसीमा बिल्डर्स ने मंचिरेवुला में 143 एकड़ ज़मीन हड़पने की कोशिश की थी। सरकार ने इस ज़मीन को बचाया और वहां पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए एक स्कूल बनवाया।
उन्होंने दावा किया कि जयशंकर भूपालपल्ली ज़िले में 400 एकड़ वन भूमि एक ऐसे विधायक को सौंप दी गई, जो बाद में BRS में शामिल हो गए थे। सरकार ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में लड़ा। रेवंत रेड्डी ने KCR और KTR को चुनौती दी कि वे ज़मीन पर कब्ज़ा करने और अवैध सौदों के आरोपों पर विधानसभा में बहस करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि मियापुर में जिन सरकारी ज़मीनों को कानूनी लड़ाई लड़कर बचाया गया है, उनका इस्तेमाल सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने में किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कैबिनेट के फैसले के बाद, मियापुर की ज़मीन से मिलने वाली आय का इस्तेमाल शिक्षा के लिए किया जाएगा। संसाधन जुटाने से जुड़ी कैबिनेट की एक उप-समिति इन प्रस्तावों का अध्ययन करेगी और तय करेगी कि इन फंड का इस्तेमाल जन-विकास कार्यों के लिए कैसे किया जाए।