तेलंगाना। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और अधिवक्ता करुणासागर ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक बयान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। करुणासागर ने अंसारी के उस कथन की आलोचना की जिसमें उन्होंने हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को कम्युनिज्म से अधिक खतरनाक बताया था। बीजेपी नेता ने कहा कि हिंदू पुनरुत्थान को चरमपंथ से जोड़ना उचित नहीं है और इस तरह की टिप्पणी से वह असहमत हैं।
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में करुणासागर ने कहा कि पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा हिंदू पुनरुत्थान को चरमपंथ की श्रेणी में रखना और उसे कम्युनिस्ट चरमपंथ से अधिक खतरनाक बताना हैरान करने वाला है। उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग विचारधाराओं को लेकर बहस हो सकती है, लेकिन किसी भी समुदाय या विचारधारा को लेकर सामान्यीकरण करना उचित नहीं है।
करुणासागर ने कहा, "पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का हिंदू पुनरुत्थान को चरमपंथ कहना और यह कहना कि हिंदू चरमपंथ, कम्युनिस्ट चरमपंथ से ज्यादा खतरनाक है, बहुत चौंकाने वाला और शर्मनाक है।" उन्होंने आरोप लगाया कि अंसारी ने देश में वामपंथी उग्रवाद से जुड़ी हिंसा और उसके प्रभाव को नजरअंदाज किया है।
बीजेपी नेता ने कहा कि माओवादी आंदोलन के नाम पर हुए हिंसक घटनाक्रमों में सुरक्षाबलों, पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों की जान गई है। उन्होंने कहा कि देश ने लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद की चुनौती का सामना किया है और इसे भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
करुणासागर ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में हर विचारधारा को संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के उग्रवाद का मूल्यांकन उसके प्रभाव और हिंसक गतिविधियों के आधार पर होना चाहिए।
गौरतलब है कि पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी समय-समय पर देश में बढ़ती सांप्रदायिकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखते रहे हैं। उनके कई बयानों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस भी होती रही है।
अंसारी के बयान पर बीजेपी की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए करुणासागर ने कहा कि देश में धार्मिक और वैचारिक मुद्दों पर चर्चा करते समय संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति विविधता और सह-अस्तित्व पर आधारित रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग एक विशेष विचारधारा को लेकर एकतरफा दृष्टिकोण पेश करते हैं। उन्होंने कहा कि देश में सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी भी तरह के उग्रवाद को समान रूप से देखा जाना चाहिए।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर देश में विचारधाराओं को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता अक्सर सांप्रदायिकता, राष्ट्रवाद, धर्म और चरमपंथ जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे के विचारों की आलोचना करते रहे हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में दक्षिणपंथ, वामपंथ और अन्य विचारधाराओं को लेकर बहस लंबे समय से चलती रही है। अलग-अलग राजनीतिक दल और नेता इन विषयों को अपने नजरिये से देखते हैं और उनके बीच मतभेद भी सामने आते हैं।
बीजेपी नेता करुणासागर ने अपने बयान में पूर्व उपराष्ट्रपति के विचारों का विरोध करते हुए कहा कि किसी भी विचारधारा को लेकर टिप्पणी करते समय ऐतिहासिक घटनाओं और वर्तमान परिस्थितियों दोनों को ध्यान में रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश की एकता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन को मजबूत करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंसा और कट्टरता का किसी भी रूप में समर्थन नहीं किया जा सकता।
हामिद अंसारी के बयान और उस पर बीजेपी नेता की प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा जारी है। दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने तर्क दिए जा रहे हैं और यह मामला वैचारिक बहस का हिस्सा बना हुआ है।