Chennai चेन्नई: विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) के विधायक एस.एस. बालाजी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया पारदर्शिता से कोसों दूर है। उन्होंने इसे “Special Intentional Revision” बताते हुए कहा कि आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को सही बनाना नहीं, बल्कि अपने हिसाब से बदलना है। बालाजी ने कहा, “अगर चुनाव आयोग का मकसद मतदाता सूची को परिपूर्ण और निष्पक्ष बनाना होता, तो उसकी हर कार्रवाई पारदर्शी होती। लेकिन हम देख रहे हैं कि यह प्रक्रिया संदेह के घेरे में है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कई इलाकों में वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जबकि फर्जी प्रविष्टियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों से शिकायतें मिल रही हैं कि आधिकारिक सत्यापन के दौरान राजनीतिक पक्षपात किया जा रहा है। “हमारे कार्यकर्ताओं ने कई जगह देखा है कि मतदाता सूची से कुछ खास समुदायों या राजनीतिक झुकाव वाले लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। अगर आयोग निष्पक्ष है, तो उसे यह बताना चाहिए कि किन मानदंडों पर नाम हटाए जा रहे हैं,” बालाजी ने कहा। VCK विधायक ने चुनाव आयोग से पूर्ण पारदर्शिता और स्वतंत्र निगरानी की मांग की। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
बालाजी ने यह भी कहा कि अगर आयोग अपनी प्रक्रिया में सुधार नहीं करता, तो उनकी पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध जारी रखेगी। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में बना रहे। किसी के साथ अन्याय न हो, यही लोकतंत्र की बुनियाद है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु में SIR प्रक्रिया को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है — एक तरफ भाजपा इसे सुधारात्मक कदम बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे “राजनीतिक मकसद से प्रेरित” बता रहा है।