चेन्नई। तमिलनाडु गवर्नमेंट कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (TNGCTA) ने कॉलेज शिक्षा की संयुक्त निदेशक सिंथिया सेल्वी को स्पष्टीकरण नोटिस जारी किए जाने को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की है। एसोसिएशन का कहना है कि जिस सर्कुलर को लेकर संयुक्त निदेशक से स्पष्टीकरण मांगा गया है, वह उनके स्तर पर लिया गया स्वतंत्र निर्णय नहीं था। उनका आरोप है कि सिंथिया सेल्वी ने केवल उच्च अधिकारियों की ओर से जारी प्रशासनिक निर्देशों का पालन किया था। ऐसे में केवल उन्हें जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
TNGCTA के महासचिव एस. सुरेश ने 22 अगस्त को जारी प्रेस बयान में सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इस मामले में संयुक्त निदेशक को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है। एसोसिएशन के अनुसार, संबंधित सर्कुलर छात्रों की भागीदारी को सीमित करने से जुड़ा था। इस सर्कुलर को लेकर विभागीय स्तर पर विवाद सामने आने के बाद संयुक्त निदेशक को स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया है।
एसोसिएशन ने दावा किया कि संयुक्त निदेशक ने अपनी ओर से कोई नया फैसला नहीं लिया था, बल्कि उन्हें उच्च अधिकारियों से प्राप्त प्रशासनिक निर्देशों के आधार पर कार्रवाई करनी थी। TNGCTA के मुताबिक, संबंधित निर्देश राज्य स्तर पर कानून-व्यवस्था को लेकर हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में लिए गए फैसलों के बाद जारी किए गए थे। एसोसिएशन ने इसी आधार पर सरकार से पूछा है कि यदि निर्देश उच्च स्तर से जारी हुए थे तो उनके अनुपालन के लिए जिम्मेदार अधिकारी को ही जवाबदेह क्यों बनाया जा रहा है।
TNGCTA के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव की ओर से जारी एक निर्देश से हुई थी। यह निर्देश 28 जुलाई को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित कानून-व्यवस्था संबंधी बैठक के कार्यवृत्त पर आधारित था। एसोसिएशन का कहना है कि बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर प्रशासनिक स्तर पर आगे निर्देश जारी किए गए और संबंधित अधिकारियों को उनका अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया।
एसोसिएशन ने अपने बयान में प्रशासनिक प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि विभागीय अधिकारियों की भूमिका प्राप्त निर्देशों को संबंधित संस्थानों तक पहुंचाने और उनका पालन सुनिश्चित करने की होती है। ऐसे में यदि किसी सर्कुलर को लेकर बाद में सवाल उठते हैं तो उसके लिए केवल उस अधिकारी को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं माना जा सकता, जिसने उच्च अधिकारियों के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की हो।
TNGCTA ने सरकार से पूरे मामले को व्यापक संदर्भ में देखने की मांग की है। महासचिव एस. सुरेश ने सवाल उठाया कि जब सर्कुलर जारी करने की प्रक्रिया के पीछे उच्च स्तर के प्रशासनिक निर्देश मौजूद थे, तो कार्रवाई केवल संयुक्त निदेशक के खिलाफ क्यों की जा रही है। एसोसिएशन का कहना है कि इस मामले में निर्णय लेने की पूरी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए।
मामला छात्रों की भागीदारी से जुड़े सर्कुलर का है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सर्कुलर में छात्रों की भागीदारी को सीमित करने से संबंधित दिशा-निर्देश दिए गए थे। इसको लेकर शिक्षा क्षेत्र में चर्चा शुरू हुई। बाद में संयुक्त निदेशक सिंथिया सेल्वी को स्पष्टीकरण नोटिस जारी किए जाने के बाद मामला और अधिक विवादित हो गया। TNGCTA ने इसे प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े बड़े सवाल के रूप में उठाया है।
एसोसिएशन का कहना है कि सरकारी विभागों में अधिकारी सामान्य तौर पर अपने वरिष्ठ अधिकारियों से प्राप्त आदेशों और निर्देशों के आधार पर काम करते हैं। यदि कोई आदेश उच्च स्तर पर तय की गई नीति या बैठक के निर्णय के आधार पर जारी होता है, तो उसके अनुपालन के लिए निचले स्तर के अधिकारी को अकेले जिम्मेदार ठहराना प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं होगा। संगठन ने इसी तर्क के आधार पर संयुक्त निदेशक को दिए गए नोटिस की प्रक्रिया पर सवाल उठाया है।
28 जुलाई को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई कानून-व्यवस्था की बैठक का उल्लेख करते हुए TNGCTA ने कहा कि इस बैठक के कार्यवृत्त के आधार पर उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव ने निर्देश जारी किए थे। एसोसिएशन के अनुसार, बाद में इन्हीं निर्देशों के क्रम में संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई हुई। इसलिए पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करते समय आदेश जारी करने की पूरी श्रृंखला को ध्यान में रखना जरूरी है।
एसोसिएशन ने सरकार की कार्रवाई को लेकर शिक्षकों के बीच उठ रही चिंताओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। संगठन का मानना है कि अधिकारियों को उनके स्तर पर प्राप्त निर्देशों के अनुसार कार्य करने के बाद यदि व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह बनाया जाता है, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था में काम करने वाले अधिकारियों के बीच असमंजस पैदा हो सकता है।
फिलहाल TNGCTA ने सरकार से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित सर्कुलर जारी करने के पीछे किस स्तर पर निर्णय लिया गया था। संगठन ने कहा है कि किसी एक अधिकारी को जिम्मेदार ठहराने के बजाय पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए।
यह मामला अब कॉलेज शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठन के बीच प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बहस का विषय बन गया है। एक ओर विभागीय स्तर पर संयुक्त निदेशक से स्पष्टीकरण मांगा गया है, वहीं TNGCTA उनके समर्थन में सामने आया है। एसोसिएशन का कहना है कि सिंथिया सेल्वी ने उच्च अधिकारियों के निर्देशों का पालन किया था। अब सरकार की ओर से इस मामले में आगे क्या कदम उठाया जाता है, इस पर शिक्षकों और शिक्षा जगत की नजर बनी हुई है।