कोयंबटूर: कोयंबटूर स्थित ICAR-गन्ना प्रजनन संस्थान (SBI-कोयंबटूर), जो राष्ट्रीय चीनी सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, ने अपना 115वां स्थापना दिवस मनाया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हैदराबाद स्थित 'इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स' (ICRISAT) के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि SBI-कोयंबटूर, ICAR से भी पुराना है और चीनी के माध्यम से इसका योगदान हर भारतीय घर तक पहुँचा है। उन्होंने बताया कि देश में गन्ने की खेती वाले कुल क्षेत्र के 80 प्रतिशत से अधिक हिस्से में ICAR-SBI की 'Co' (को) किस्मों की खेती की जाती है।
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास 'आनंदमठ' का जिक्र करते हुए, डॉ. पाठक ने कहा कि जिस तरह राजा महेंद्र अपने कर्तव्य के प्रति पूरी तरह समर्पित थे, उसी तरह वैज्ञानिकों और कर्मचारियों को भी अपने संस्थान की प्रगति के लिए निस्वार्थ भाव से और समर्पित होकर काम करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज का कृषि परिदृश्य विज्ञान, तकनीक, जलवायु, मिट्टी, पानी की स्थिति और सामाजिक अपेक्षाओं के मामले में पहले से काफी अलग है। उन्होंने शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि वे इन नई चुनौतियों से निपटने के लिए कुछ नया और व्यावहारिक समाधान खोजें।
डॉ. पाठक ने ICRISAT और ICAR-SBI के बीच सहयोग की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से उन्नत जीनोमिक तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), प्रिसिजन फेनोटाइपिंग और जलवायु-अनुकूल प्रजनन (climate-resilient breeding) के जरिए गन्ने की किस्मों में सुधार लाने की प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि गन्ना न केवल चीनी का, बल्कि ऊर्जा, पशु चारे, ईंधन और दवाओं (फार्मास्यूटिकल्स) का भी स्रोत है, जिसे आज की तकनीक के जरिए हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नई विज्ञान और तकनीक के साथ-साथ AI टूल्स का इस्तेमाल कृषि विस्तार (agricultural extension) में भी किया जा सकता है। उन्होंने संस्थान की हालिया शोध पहलों की सराहना की।
इस अवसर पर, उन्होंने गन्ने की खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध और सर्वश्रेष्ठ थीसिस के लिए 'सर टी. एस. वेंकटरमन पुरस्कार' (2024-25 द्विवार्षिक अवधि के लिए) प्रदान किए।
ICAR-SBI के निदेशक डॉ. पी. गोविंदराज ने गन्ने की नई किस्में विकसित करने में संस्थान के हालिया योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पिछले साल संस्थान ने तीन किस्में जारी कीं: प्रायद्वीपीय भारत के लिए उच्च गुणवत्ता वाली किस्म 'Co 18003'; तमिलनाडु के लिए अधिक उपज देने वाली किस्म 'Co 21003'; और उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के लिए मध्यम-देर से पकने वाली किस्म 'Co 18022'।