चेन्नई: विस्तृत चर्चा के बाद, राज्य मंत्रिमंडल ने गुरुवार को 'बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) नीति 2026' को मंजूरी दे दी। 1 MW और उससे अधिक क्षमता वाली परियोजनाओं पर केंद्रित इस नीति का उद्देश्य बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन नेटवर्क में BESS की स्थापना में तेजी लाना, नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) के उपयोग को बेहतर बनाना और नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न बिजली की बर्बादी (curtailment) को कम करना है।
TNIE द्वारा देखी गई इस नीति में बैटरी स्टोरेज सिस्टम की दो श्रेणियां शामिल हैं - 'स्टैंडअलोन BESS' (स्वतंत्र BESS) और 'को-लोकेटेड BESS' (साथ में स्थित BESS)।
'स्टैंडअलोन BESS' से तात्पर्य 1 MW से अधिक क्षमता वाले स्वतंत्र बैटरी स्टोरेज सिस्टम से है। इन प्रणालियों को ट्रांसमिशन या डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, या निजी उपभोक्ताओं के नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है।
ये प्रणालियां लागू ट्रांसमिशन और व्हीलिंग शुल्कों (wheeling charges) से 100% छूट पाने की पात्र होंगी। इन स्टैंडअलोन BESS का उपयोग पीक-आवर (अधिक मांग वाले समय) की जरूरतों को पूरा करने, ग्रिड संचालन में सहायता करने और अन्य स्वीकृत सेवाएं प्रदान करने के लिए किया जा सकता है।
'को-लोकेटेड BESS' से तात्पर्य उन बैटरी स्टोरेज सिस्टम से है, जो 1 MW से अधिक क्षमता वाली सौर, सोलर-हाइब्रिड या अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के साथ एकीकृत (जुड़े हुए) होते हैं। ये प्रणालियां संबंधित नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों द्वारा उत्पन्न बिजली को स्टोर करती हैं और पीक-डिमांड के समय या जरूरत पड़ने पर उसे सप्लाई करती हैं।