Tamil Nadu राजनीति में बढ़ा तनाव

Update: 2026-06-25 09:29 GMT

Chennai चेन्नई : तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री विजय और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। सदन में दिए गए बयानों ने सत्ता और विपक्ष के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

जानकारी के अनुसार, हाल ही में विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विजय ने अपने पारंपरिक “कुट्टी स्टोरी” अंदाज में भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की विधानसभा से अनुपस्थिति पर अप्रत्यक्ष रूप से तंज कसा। उन्होंने कथित तौर पर विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन से सवाल किया कि उनके पिता एमके स्टालिन सदन में क्यों नहीं आते और वे कहां हैं।

सीएम विजय के इस बयान को विपक्ष ने राजनीतिक हमला बताया और इस पर कड़ी आपत्ति जताई। कई नेताओं ने इसे व्यक्तिगत टिप्पणी करार देते हुए सदन की गरिमा के खिलाफ बताया।

वहीं, इस पूरे विवाद पर एमके स्टालिन ने भी करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि वह विधानसभा में आएं या न आएं, लेकिन वह जनता के दिलों में हमेशा मौजूद हैं। उनके इस बयान को राजनीतिक रूप से मजबूत संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

स्टालिन ने यह भी संकेत दिया कि उनकी राजनीतिक सक्रियता केवल विधानसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जनता के बीच लगातार मौजूद रहते हैं। उनके इस बयान के बाद डीएमके समर्थकों ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नेताओं की असली ताकत जनता का समर्थन होता है, न कि सदन में उपस्थिति मात्र।

विधानसभा के अंदर हुई इस बयानबाजी के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही एक-दूसरे पर लगातार हमलावर नजर आ रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति में इसका असर देखने को मिल सकता है। खासकर जब राज्य में पहले से ही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज है, ऐसे में इस तरह की बयानबाजी माहौल को और तनावपूर्ण बना सकती है।

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