चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई और चेय्यार सिपकॉट (SIPCOT) औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने वाली प्रस्तावित चार-लेन सड़क परियोजना के लिए जारी टेंडर को रद्द कर दिया है। सरकार के इस फैसले को राज्य में सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं और पूर्व में जारी किए गए ठेकों की व्यापक समीक्षा के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि सभी सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से टेंडर प्रक्रिया की दोबारा जांच की जा रही है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, चेन्नई-चेय्यार सिपकॉट सड़क परियोजना राज्य की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना योजनाओं में शामिल है। इस सड़क के निर्माण का उद्देश्य चेन्नई महानगर को औद्योगिक क्षेत्रों से बेहतर ढंग से जोड़ना, माल परिवहन को आसान बनाना और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देना था। हालांकि, टेंडर प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा के बाद सरकार ने मौजूदा निविदा को रद्द करने का निर्णय लिया है।
राज्य सरकार का कहना है कि किसी भी बड़ी परियोजना में पारदर्शी और निष्पक्ष टेंडर प्रक्रिया अत्यंत आवश्यक है। यदि किसी स्तर पर प्रक्रिया को लेकर संदेह या तकनीकी आपत्तियां सामने आती हैं, तो सरकार का दायित्व है कि वह पूरे मामले की समीक्षा करे और आवश्यकता पड़ने पर नई निविदा जारी करे। इसी नीति के तहत इस परियोजना के टेंडर को निरस्त किया गया है।
सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व में राज्य प्रशासन विभिन्न विकास परियोजनाओं को गति देने के साथ-साथ सरकारी खर्च में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। इसी क्रम में पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा जारी किए गए ठेकों और निविदाओं की भी समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी परियोजनाओं का तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर परीक्षण किया जाए ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को समाप्त किया जा सके।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि समीक्षा प्रक्रिया का उद्देश्य विकास कार्यों को रोकना नहीं, बल्कि उन्हें अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। यदि किसी परियोजना में नियमों का पूर्ण पालन हुआ है, तो उसे आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं जिन मामलों में तकनीकी या प्रक्रियागत कमियां सामने आएंगी, उनमें आवश्यक सुधार के बाद नई टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
चेन्नई-चेय्यार सिपकॉट सड़क परियोजना को औद्योगिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। चेय्यार सिपकॉट क्षेत्र में अनेक औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं और भविष्य में भी नए निवेश की संभावनाएं हैं। बेहतर सड़क संपर्क बनने से माल परिवहन की लागत कम होने, यात्रा समय घटने और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी। इसलिए टेंडर रद्द होने के बाद उद्योग जगत की निगाहें अब सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई टेंडर प्रक्रिया शीघ्र शुरू कर दी जाती है और निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा होता है, तो परियोजना का दीर्घकालिक लाभ उद्योगों, परिवहन क्षेत्र और स्थानीय लोगों को मिलेगा। हालांकि, टेंडर रद्द होने से परियोजना की समयसीमा पर कुछ असर पड़ सकता है।
राजनीतिक हलकों में भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि सार्वजनिक धन का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए और यदि किसी परियोजना में प्रक्रिया संबंधी सवाल उठते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। वहीं विपक्ष सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग कर रहा है कि टेंडर रद्द करने के पीछे क्या विशिष्ट कारण रहे और नई निविदा कब जारी की जाएगी।
उद्योग संगठनों ने सरकार से आग्रह किया है कि समीक्षा प्रक्रिया को जल्द पूरा कर परियोजना को शीघ्र आगे बढ़ाया जाए। उनका कहना है कि तमिलनाडु देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल है और आधुनिक सड़क नेटवर्क उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इस परियोजना में अनावश्यक देरी से बचना जरूरी है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, संबंधित विभाग अब परियोजना की तकनीकी शर्तों, लागत अनुमान और निविदा प्रक्रिया का पुनर्मूल्यांकन करेगा। इसके बाद आवश्यक संशोधन कर नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। सरकार का दावा है कि भविष्य में जारी होने वाली सभी निविदाएं निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के अनुरूप होंगी।
फिलहाल चेन्नई-चेय्यार सिपकॉट चार-लेन सड़क परियोजना का टेंडर रद्द किए जाने से राज्य की आधारभूत संरचना परियोजनाओं की समीक्षा को नई गति मिली है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार नई निविदा कब जारी करती है और परियोजना को किस समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाया जाता है। उद्योग जगत, स्थानीय नागरिकों और निवेशकों की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह सड़क भविष्य में राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।