चेन्नई: रेत और अन्य छोटे-बड़े खनिजों की बड़े पैमाने पर हो रही अवैध खुदाई और ढुलाई को रोकने के लिए, प्राकृतिक संसाधन विभाग ने हाथ से जारी होने वाले ट्रांज़िट पास और परमिट बंद करने का फ़ैसला किया है। इनकी जगह 'मिनरल मैनेजमेंट सिस्टम' (MIMAS) पोर्टल से बनने वाले QR-कोड वाले ऑनलाइन परमिट शुरू किए जाएंगे।

विभाग खदानों पर लगे वे-ब्रिज (वज़न करने वाली मशीनों) को भी MIMAS पोर्टल से जोड़ने की योजना बना रहा है, ताकि खनिजों से लदे वाहनों में क्षमता से ज़्यादा भार (ओवरलोडिंग) न हो और कंट्रोल रूम के ज़रिए खनिजों की ढुलाई पर बेहतर नज़र रखी जा सके। QR-कोड वाले पास से खनिजों के वज़न की सही जानकारी मिल सकेगी, जिससे सरकार रेवेन्यू, GST कलेक्शन और उस खदान का पता लगा सकेगी जहाँ से खनिज निकाले गए हैं।

प्राकृतिक संसाधन मंत्री डीके प्रभु ने मंगलवार को यहाँ जियोलॉजी और माइनिंग निदेशालय में स्टेकहोल्डर्स की बैठक में कहा कि QR-कोड वाले परमिट और ट्रांज़िट पास जल्द ही जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब खनिजों की ढुलाई के लिए हाथ से लिखे पास जारी नहीं किए जाएंगे।

यह कदम सरकार की उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत एक इंटीग्रेटेड डिजिटल मिनरल मैनेजमेंट सिस्टम बनाया जा रहा है, ताकि माइनिंग गतिविधियों को पूरी तरह से डिजिटल किया जा सके और अवैध खुदाई व ढुलाई पर रोक लगाई जा सके।

जियोलॉजी और माइनिंग विभाग के अधिकारियों ने TNIE को बताया कि मुख्य खनिज लीज़ (जैसे चूना पत्थर की खदानों) वाले इलाकों में वे-ब्रिज को हाल ही में पोर्टल से जोड़ा गया है। एक अधिकारी ने कहा, "छोटे खनिजों के लिए भी ऐसा ही सिस्टम लाने पर काम चल रहा है।"

अधिकारी ने आगे कहा कि खनिजों से लदे ट्रकों में GPS डिवाइस लगाने की डेडलाइन 30 सितंबर है। तमिलनाडु सैंड लॉरी ओनर्स फ़ेडरेशन (TNSLOF) के जनरल सेक्रेटरी जी. गणेश ने कहा कि जब कॉन्ट्रैक्टर रेत की अवैध ढुलाई के लिए नकली परमिट का इस्तेमाल करते हैं, तो अक्सर ट्रक ड्राइवरों को जुर्माना भरना पड़ता है।

उन्होंने कहा, "हाल ही में तिरुवल्लूर ज़िले में नकली ट्रांज़िट पास और परमिट का इस्तेमाल करके मिट्टी की ढुलाई करने वाले लगभग 14 ट्रकों को ज़ब्त किया गया। ट्रक ड्राइवरों और मालिकों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किए गए हैं। हम ई-वे बिल बनाने के लिए ऑनलाइन सिस्टम शुरू करने की मांग कर रहे हैं।"

"सरकार को नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए हर क्रशर यूनिट पर अधिकारी भी तैनात करने चाहिए। अगर ऑनलाइन बना ई-वे बिल संबंधित सरकारी अधिकारी के हस्ताक्षर के साथ जारी किया जाए, तो इससे ट्रक ड्राइवरों को कॉन्ट्रैक्टरों की गलतियों के लिए ज़िम्मेदार ठहराए जाने से बचाया जा सकेगा।" तमिलनाडु स्टेट सैंड लॉरी ओनर्स फेडरेशन (TNSSLOF) के प्रेसिडेंट सेल्ला राजामणि ने कहा कि सरकार को पत्थर की खदानों में मौजूद वेब्रिज (वजन करने वाली मशीनों) को MIMAS पोर्टल से जोड़ने का काम तेज़ी से करना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा, "अभी भी कई अवैध खदानें चल रही हैं। इसके अलावा, सरकार को पत्थर की खदानों का कामकाज अपने हाथ में ले लेना चाहिए और अच्छी क्वालिटी की M-सैंड और P-सैंड बेचनी चाहिए।"

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