Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को उस समय बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला जब विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा में TVK सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की मौजूदा सरकार को बहुमत वोटरों का वास्तविक समर्थन हासिल नहीं है और सरकार ने AIADMK के कुछ विधायकों के समर्थन के आधार पर सत्ता में बने रहने की स्थिति बनाई है।

विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की कार्रवाई के दौरान अपने संबोधन में उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि सरकार जिस तरह से सत्ता में आई है, उस पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस AIADMK समूह का समर्थन सरकार ने लिया है, उस पर पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं।

उदयनिधि ने अपने भाषण में यह भी मांग की कि पिछली DMK सरकार द्वारा शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं को वर्तमान सरकार जारी रखे, ताकि आम जनता को राहत मिलती रहे। उन्होंने कहा कि वेलफेयर स्कीमों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और यह जनता के हित में निरंतर चलनी चाहिए।

फ्लोर टेस्ट के दौरान विपक्षी दल DMK ने मतदान प्रक्रिया का बहिष्कार किया और वॉकआउट कर दिया। इसके बावजूद, TVK सरकार ने 144 विधायकों के आसान अंतर से विश्वास मत जीत लिया। सरकार की इस जीत को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

उदयनिधि स्टालिन ने अपने भाषण में चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में कुल लगभग 4.93 करोड़ लोगों ने मतदान किया था। उन्होंने कहा कि इनमें से केवल 1.72 करोड़ वोट ही सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में पड़े, जबकि लगभग 3.21 करोड़ लोगों ने उनके खिलाफ मतदान किया।

उन्होंने कहा, “पहली बात यह है कि ज़्यादातर लोगों ने TVK को वोट नहीं दिया। क्या आप जानते हैं कि रूलिंग पार्टी को कितने लोगों ने वोट दिया? सिर्फ 1.72 करोड़। बाकी लगभग 3.21 करोड़ लोगों ने आपकी पार्टी के खिलाफ वोट दिया है, और आपको यह समझना चाहिए।”

इस बयान के बाद सदन में माहौल काफी गर्म हो गया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सत्ता पक्ष ने उदयनिधि के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार देते हुए खारिज किया, जबकि विपक्ष ने सरकार की जनादेश की वैधता पर सवाल उठाना जारी रखा।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फ्लोर टेस्ट केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं बल्कि तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों का संकेत भी है। सरकार की ओर से जहां स्थिरता का दावा किया जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे कमजोर जनादेश बता रहा है।

फिलहाल, तमिलनाडु की राजनीति में TVK सरकार की वैधता और समर्थन को लेकर बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रूप ले सकता है।

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