Tamil Nadu : विधायकों से कथित संपर्क मामले में सेंथिल बालाजी की बढ़ीं मुश्किलें

Update: 2026-07-15 03:36 GMT

चेन्नई : तमिलनाडु में कथित तौर पर टीडीपी विधायकों से संपर्क कर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के आरोपों से जुड़े मामले में डीएमके विधायक सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। थिरुवल्लिकेनी कोर्ट द्वारा व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किए जाने के बावजूद दोनों निर्धारित समय के भीतर अदालत में उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद सेंथिल बालाजी ने थिरुवल्लिकेनी के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस को पत्र भेजकर दावा किया है कि प्राथमिकी (एफआईआर) में उनका और उनके भाई का नाम ही दर्ज नहीं है, इसलिए उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले विधिवत नोटिस दिया जाना चाहिए।

यह पूरा मामला टीडीपी विधायक इलियाराजा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि डीएमके से जुड़े कुछ लोगों ने तमिलनाडु में टीडीपी के विधायकों से संपर्क कर उन्हें पार्टी से अलग करने और राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। अब तक इस मामले में 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया जा चुका है और उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

पुलिस जांच के दौरान कथित तौर पर यह जानकारी सामने आई कि कोयंबटूर साउथ से विधायक सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार की भी इस पूरे मामले में भूमिका हो सकती है। जांच एजेंसियों ने विभिन्न बयानों, कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों के संबंध में पूछताछ की प्रक्रिया शुरू की। इसी के चलते थिरुवल्लिकेनी कोर्ट ने दोनों को सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का समन जारी किया।

गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए सेंथिल बालाजी और अशोक कुमार ने पहले ही मद्रास हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने दोनों को एंटीसिपेटरी बेल प्रदान कर दी थी। इसके बावजूद अदालत के समन के पांच दिन बाद तक भी दोनों कोर्ट में पेश नहीं हुए। अदालत में अनुपस्थित रहने को लेकर अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या उन्होंने न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किया है।

इसी बीच सेंथिल बालाजी की ओर से थिरुवल्लिकेनी के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस को एक विस्तृत पत्र भेजा गया है। पत्र में उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में न तो उनका नाम है और न ही उनके भाई अशोक कुमार का। ऐसे में उन्हें सीधे अदालत में पेश होने के लिए बुलाया जाना कानून के अनुरूप नहीं है।

पत्र में सेंथिल बालाजी ने लिखा, "पुलिस द्वारा दर्ज मामले की प्राथमिकी में न तो मेरा नाम है और न ही मेरे भाई अशोक कुमार का नाम है। जब मामले में हमारा नाम ही नहीं है तो हमें क्यों बुलाया गया? यदि पुलिस को पूछताछ करनी है तो उसे कानून के अनुसार उचित नोटिस जारी करना चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा कि कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्हें संबंधित प्रावधानों के तहत नोटिस दिया जाना चाहिए, ताकि वे विधि के अनुरूप जांच में शामिल हो सकें। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बिना वैधानिक नोटिस जारी किए सीधे अदालत में पेश होने का निर्देश देना उचित नहीं माना जा सकता।

सेंथिल बालाजी ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि वे जांच से बचने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कानून के अनुसार नोटिस जारी किया जाता है तो वे जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे। उनका कहना है कि जांच एजेंसियों को भी संविधान और कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या वास्तव में टीडीपी विधायकों से संपर्क कर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का कोई संगठित प्रयास किया गया था। जांच पूरी होने के बाद यदि पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक हलकों में भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर डीएमके पर निशाना साध रहे हैं, जबकि डीएमके की ओर से अभी तक इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सेंथिल बालाजी के पत्र के बाद अब यह मामला केवल राजनीतिक नहीं बल्कि कानूनी बहस का भी विषय बन गया है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम एफआईआर में नहीं है, तब भी जांच एजेंसी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उससे पूछताछ कर सकती है। हालांकि, इसके लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होता है। ऐसे मामलों में उचित नोटिस जारी करना और व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर देना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

अब सभी की निगाहें थिरुवल्लिकेनी कोर्ट की अगली सुनवाई और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि अदालत यह मानती है कि समन का पालन नहीं किया गया है तो आगे कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। वहीं, यदि पुलिस सेंथिल बालाजी की आपत्ति को ध्यान में रखते हुए विधिवत नोटिस जारी करती है, तो उनसे औपचारिक पूछताछ की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

फिलहाल यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में कथित विधायकों से संपर्क, जांच एजेंसियों की भूमिका और कानूनी प्रक्रिया के पालन को लेकर नई बहस छेड़ चुका है। आने वाले दिनों में अदालत और पुलिस की कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

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