Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु ग्रीन एनर्जी कॉर्पोरेशन द्वारा विंड और सोलर पावर प्लांट को सबस्टेशन से जोड़ने या उससे जुड़े दस्तावेज़ों पर साइन करने के लिए दिए गए आवेदन को मंज़ूरी न देने के हालिया आदेश ने राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में निवेश करने वाली कंपनियों में चिंता और खलबली मचा दी है। यह निर्णय उन निवेशकों के लिए चिंता का कारण बन गया है जो तमिलनाडु में नए विंड और सोलर पावर प्रोजेक्ट्स लगाने की योजना बना रहे हैं।

तमिलनाडु में प्राकृतिक रूप से पवन और सौर ऊर्जा के लिए अनुकूल माहौल होने के कारण पिछले कुछ वर्षों में कई प्राइवेट कंपनियाँ इस सेक्टर में निवेश कर रही हैं। राज्य में विंड टर्बाइन और सोलर पैनल लगाने वाली कंपनियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन कंपनियों को लाभकारी संचालन और बिजली उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए ग्रीन एनर्जी कॉर्पोरेशन से समय पर मंज़ूरी की आवश्यकता होती है।

विंड और सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए कंपनियों को पहले सही स्थान का चयन करना होता है। इसके लिए यह देखना जरूरी है कि नजदीकी सबस्टेशन में बिजली सप्लाई करने की सुविधा उपलब्ध है या नहीं। इसके बाद कंपनियों को ग्रीन एनर्जी कॉर्पोरेशन में रिपोर्ट और एप्लीकेशन जमा करना होता है।

पावर प्लांट का निर्माण पूरा होने के बाद, चीफ इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर के कार्यालय द्वारा प्लांट की तकनीकी और सेफ्टी जांच की जाती है। इसके बाद ही उन्हें मंज़ूरी दी जाती है। सभी प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद ही इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को सबस्टेशन को पावर ग्रिड से जोड़ने की अनुमति मिलती है, जिससे जेनरेट की गई बिजली राज्य के नेटवर्क में सप्लाई की जा सके।

हाल के आदेश के बाद कई निवेशक चिंतित हैं कि परियोजनाओं के समय पर कनेक्शन और मंज़ूरी में देरी उनके निवेश पर नकारात्मक असर डाल सकती है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में तेजी से निवेश और प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ रही है, इसलिए किसी भी तरह की अड़चन या प्रशासनिक देरी पूरे निवेश वातावरण को प्रभावित कर सकती है।

सरकारी आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि एप्लीकेशन मंज़ूरी न देने के पीछे क्या कारण हैं। निवेशकों का कहना है कि अगर ग्रीन एनर्जी कॉर्पोरेशन आवेदन की मंज़ूरी में देरी या रोक लगाएगी, तो कंपनियों के लिए नई परियोजनाएँ शुरू करना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा, इस निर्णय का प्रभाव वित्तीय योजना, निर्माण और बिजली बिक्री अनुबंधों पर भी पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए समय पर मंज़ूरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सरल होना जरूरी है। तमिलनाडु में ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए प्राइवेट निवेशकों का सहयोग आवश्यक है। इस आदेश से निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ने की संभावना है, जो आगे चलकर राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार को प्रभावित कर सकती है।

सरकार और ग्रीन एनर्जी कॉर्पोरेशन से अपेक्षा है कि वे निवेशकों के साथ स्पष्ट संवाद स्थापित करें और मंज़ूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएं। ताकि तमिलनाडु में विंड और सोलर पावर प्रोजेक्ट्स सुचारु रूप से चल सकें और राज्य की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में वृद्धि हो सके।

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