Tamil Nadu: विरुधुनगर जिले में निजी सौर परियोजना को रद्द करें, किसानों ने सरकार को बताया
विरुधुनगर ज़िले में करियापट्टी के पास तीन गांवों के किसानों ने एक विवादित प्राइवेट सोलर पावर प्रोजेक्ट का विरोध तेज़ कर दिया है। उनका आरोप है कि इससे कोविलंगुलम, अवारमपट्टी और मानवरांथई में पानी इकट्ठा होने वाले इलाकों (कैचमेंट एरिया) और सिंचाई पर बुरा असर पड़ेगा।
किसान कई महीनों से इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि सरकारी 'अनाधीनम्' ज़मीन पर बनने वाला सोलर प्लांट स्थानीय तालाबों और नहरों में बारिश के पानी के प्राकृतिक बहाव को रोक सकता है। उन्हें डर है कि कैचमेंट एरिया के नुकसान से खेती और स्थानीय जल स्रोतों पर निर्भर किसान परिवारों की आजीविका पर असर पड़ेगा।
किसानों ने जल निकायों (water bodies) की सुरक्षा की अपनी मांग के समर्थन में मद्रास हाई कोर्ट के जून के एक आदेश का हवाला दिया। विवाद के संबंध में, उन्होंने बताया कि कोर्ट ने संबंधित कंपनी का यह आश्वासन दर्ज किया था कि कोविलंगुलम में सर्वे नंबर 9, 11, 14, 15 और 16 पर कोई सोलर पैनल नहीं लगाया जाएगा। साथ ही, कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे यह सुनिश्चित करें कि इन सर्वे नंबरों वाली ज़मीन को जल निकायों के तौर पर बनाए रखा जाए और उन्हें अतिक्रमण से मुक्त रखा जाए।
कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए, किसान अब पानी इकट्ठा होने वाले उन अन्य इलाकों के लिए भी वैसी ही सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, जिन पर प्रस्तावित प्रोजेक्ट का असर पड़ने का आरोप है।
लगातार हो रहे विरोध के बीच, तमिलनाडु किसान संघ ने सोमवार को सरकार से दखल देने की मांग की। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इस प्रोजेक्ट को तीन गांवों के जल स्रोतों को प्रभावित करने से रोकें। संघ के राज्य अध्यक्ष ओ.ए. नारायणसामी, कोषाध्यक्ष सुब्बाराज और मदुरै ज़िला अध्यक्ष श्रीनिवासन ने सोमवार को चेन्नई में सचिवालय में ऊर्जा संसाधन और कानून मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार से मुलाकात की। उन्होंने सरकारी 'अनाधीनम्' ज़मीन पर प्रोजेक्ट की मंज़ूरी देने वाले सरकारी आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए एक याचिका सौंपी। उनका तर्क था कि क्षेत्र के किसानों के सिंचाई हितों की रक्षा के लिए ऐसा करना ज़रूरी है।
श्री नारायणसामी ने आरोप लगाया कि पिछली DMK सरकार ने किसानों के कड़े विरोध के बावजूद इस सोलर प्रोजेक्ट के लिए प्राइवेट कंपनी को शुरुआती मंज़ूरी दी थी, क्योंकि कंपनी के कथित संबंध पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के दामाद वी. सबरीसन से थे।
किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार आधिकारिक तौर पर इस सोलर प्रोजेक्ट को रद्द नहीं करती, तब तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे।