नई दिल्ली : तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री थलपति विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को लेकर नई हलचल तेज हो गई है। फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय ने जिस तेजी से राज्य की सत्ता तक का सफर तय किया, अब उनके सामने सरकार बचाने और गठबंधन संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
विजय की पार्टी को सत्ता तक पहुंचने में सहयोगी दलों का अहम योगदान रहा है। लेकिन अब प्रधानमंत्री पद को लेकर शुरू हुई चर्चाओं ने गठबंधन की राजनीति में तनाव पैदा कर दिया है। TVK के कुछ नेताओं की ओर से विजय को भविष्य के प्रधानमंत्री चेहरे के रूप में पेश किए जाने के बाद कांग्रेस के भीतर नाराजगी की खबरें सामने आई हैं।
PM पद की चर्चा ने बढ़ाई गठबंधन में हलचल
राजनीति में अक्सर ऐसा देखा गया है कि राज्य की सत्ता संभालने वाले नेता राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश करते हैं। विजय के समर्थकों ने भी उन्हें केवल तमिलनाडु तक सीमित नेता नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने वाला चेहरा बताना शुरू कर दिया है।
हालांकि गठबंधन में शामिल कांग्रेस के लिए यह मुद्दा संवेदनशील बन गया है। कांग्रेस लंबे समय से राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए विपक्षी गठबंधन का प्रमुख चेहरा मानती रही है। ऐसे में विजय को PM उम्मीदवार के तौर पर आगे बढ़ाने की कोशिश कांग्रेस के लिए चुनौती मानी जा रही है।
कांग्रेस दे सकती है समर्थन पर शर्त
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कांग्रेस सरकार में अपनी भूमिका को लेकर दबाव बना सकती है। कुछ कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी है। अगर सहयोगी दल अलग राह पकड़ते हैं तो इसका असर राज्य सरकार की स्थिरता पर पड़ सकता है।
हालांकि कांग्रेस और TVK दोनों तरफ से कई नेता गठबंधन में किसी बड़ी दरार से इनकार भी कर रहे हैं। कांग्रेस नेता थरहाई काथबर्ट ने दावा किया कि विजय और राहुल गांधी के बीच अच्छे संबंध हैं और दोनों दलों के बीच विवाद नहीं है।
बहुमत के लिए सहयोगियों पर निर्भर सरकार
विजय की सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती विधानसभा में संख्या बल बनाए रखना है। गठबंधन सरकारों में सहयोगी दलों का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर किसी बड़े सहयोगी ने समर्थन वापस लिया तो सरकार पर बहुमत साबित करने का दबाव आ सकता है।
यही वजह है कि विजय के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना है, वहीं दूसरी तरफ गठबंधन के सभी दलों को साथ लेकर चलना भी जरूरी है।
क्या राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा भारी पड़ेगी?
विजय की लोकप्रियता उनकी सबसे बड़ी ताकत है। अभिनेता के तौर पर उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग रही है और राजनीति में आने के बाद उन्होंने युवाओं को जोड़ने की कोशिश की है। लेकिन राजनीति में केवल लोकप्रियता काफी नहीं होती, संगठन और गठबंधन प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
अगर विजय अभी से राष्ट्रीय राजनीति में अपनी दावेदारी मजबूत करने लगते हैं तो विरोधी दल इसे मुख्यमंत्री पद पर ध्यान कम करने के रूप में पेश कर सकते हैं। विपक्ष यह सवाल उठा सकता है कि क्या राज्य की जिम्मेदारी संभालते हुए राष्ट्रीय राजनीति की तैयारी करना सही रणनीति है।
सहयोगियों को साधना होगी पहली प्राथमिकता
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विजय के लिए फिलहाल सबसे जरूरी काम सरकार को मजबूत करना है। उन्हें अपने सहयोगियों को विश्वास में रखना होगा और यह संदेश देना होगा कि उनकी पहली प्राथमिकता तमिलनाडु का विकास और शासन है।
प्रधानमंत्री पद की चर्चा भविष्य की राजनीति का हिस्सा हो सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाए रखना तत्काल चुनौती है। गठबंधन राजनीति में छोटी सी नाराजगी भी बड़े संकट में बदल सकती है।
फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या थलपति विजय मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते हुए राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ेंगे या फिर PM पद की महत्वाकांक्षा उनके लिए राजनीतिक मुश्किलें खड़ी कर सकती है। आने वाले समय में कांग्रेस और TVK के रिश्ते इस पूरे समीकरण की दिशा तय करेंगे।
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