चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (MHAA) द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई को एक हफ्ते के लिए टाल दिया है। इस याचिका में तमिलनाडु के उस प्रस्ताव पर विचार करने की मांग की गई है, जिसमें हाई कोर्ट की कार्यवाही में अंग्रेजी के साथ-साथ तमिल भाषा के वैकल्पिक इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य तमिल भाषी लोगों को अपने मुकदमों को समझने, उनमें हिस्सा लेने और अपने वकीलों को बेहतर तरीके से निर्देश देने में सक्षम बनाना है।
सोमवार को जब मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पहली डिवीजन बेंच के सामने यह जनहित याचिका सुनवाई के लिए आई, तो याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील आर. सी. पॉल कनागराज ने बताया कि मदुरै बार एसोसिएशन के सचिव ने भी इसी तरह की एक याचिका दायर की है, जो अभी लिस्ट नहीं हुई है। बेंच ने सुनवाई को एक हफ्ते के लिए टाल दिया और कहा कि वह दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगी।
MHAA के सचिव एस. अरिवझगन द्वारा दायर इस याचिका में केंद्रीय मंत्रिमंडल के 21 मई, 1965 के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत अंग्रेजी को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की आम भाषा बना दिया गया था।