मंदिर की परंपराओं की जानकारी के बिना कार्यकारी अधिकारियों की नियुक्ति से बचें
चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में HR&CE विभाग को निर्देश दिया है कि वे मंदिरों में 'फिट पर्सन' (प्रबंधक) के तौर पर ऐसे कार्यकारी अधिकारियों (EO) की नियुक्ति न करें, जिन्हें मंदिर की परंपराओं और रीति-रिवाजों की पूरी जानकारी न हो। कोर्ट ने चिंता जताई कि ऐसी नियुक्तियों से मंदिरों की पहचान खो सकती है।
न्यायमूर्ति कृष्णन रामासामी ने यह निर्देश अरियालुर के कोट्टियाल निवासी आर. तमिलरासु की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में HR&CE विभाग के 10 जुलाई, 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें मरियम्मन मंदिर के कामकाज को संभालने के लिए ट्रस्टियों की जगह एक कार्यकारी अधिकारी (EO) को 'फिट पर्सन' नियुक्त किया गया था।
न्यायाधीश ने कहा कि कोर्ट पहले भी कई मामलों में यह स्पष्ट कर चुका है कि 'फिट पर्सन' के रूप में EO की नियुक्ति करना उचित नहीं है, क्योंकि यह पद केवल एक औपचारिकता नहीं है। 'फिट पर्सन' असल में मंदिर के ट्रस्टी या 'धर्मकर्ता' की भूमिका निभाता है।
न्यायाधीश ने कहा कि हो सकता है कि 'फिट पर्सन' को मंदिर की परंपराओं और रीति-रिवाजों की अच्छी जानकारी न हो। ऐसे में, जब वह धार्मिक कार्यों को पारंपरिक तरीके से नहीं करता, तो समय के साथ वे परंपराएं धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं।
'धर्मकर्ता' के "धार्मिक" कार्यों का जिक्र करते हुए, न्यायाधीश ने कहा कि HR&CE अधिनियम के तहत, EO की नियुक्ति मुख्य रूप से मंदिर के "लौकिक" (secular) और "वित्तीय" मामलों को संभालने के लिए की जाती है; उनसे धार्मिक मामलों को देखने की न तो उम्मीद की जाती है और न ही वे इसके लिए सक्षम होते हैं।