चेन्नई: DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटाने और मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को रोकने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि एक खोजी समाचार रिपोर्ट में हुए खुलासों ने चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्टालिन ने 'X' पर कहा, "ज्ञानेश कुमार को अब पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटना चाहिए। SIR प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए।" पूर्व मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग के भीतर हुई घटनाओं की "निष्पक्ष और गहन जांच" की मांग की और कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

स्टालिन ने कहा कि DMK और अन्य विपक्षी दलों ने लगातार SIR प्रक्रिया का विरोध किया है। उनका आरोप है कि चुनावों से पहले कई राज्यों में यह संशोधन "जल्दबाजी में" किया जा रहा था, जिसके कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि विस्तृत समाचार रिपोर्ट के खुलासों से पता चलता है कि CEC अन्य दो आयुक्तों की सहमति के बिना "एकतरफा और गुप्त रूप से" काम कर रहे थे।

उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग तीन सदस्यों वाली संस्था है, जिसके कामकाज को जहां तक ​​संभव हो, सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए। जहां आयुक्तों की राय अलग-अलग हो, वहां निर्णय बहुमत की राय पर आधारित होना चाहिए।" समाचार रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्टालिन ने कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा जताई गई आपत्तियों को 14 मौकों पर नजरअंदाज किया गया और इससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता "बुरी तरह प्रभावित" हुई है।

DMK प्रमुख ने सवाल उठाया कि आयोग के नाम पर लिए गए फैसलों को वैध कैसे माना जा सकता है, जबकि इसके तीन में से दो सदस्यों को कथित तौर पर उन फैसलों की जानकारी ही नहीं दी गई। उन्होंने मतदाता सूची से जुड़ी अपीलों के निपटारे पर भी सवाल उठाए, खासकर उन मामलों में जहां अदालतों ने मतदाताओं के नाम सूची में शामिल करने का निर्देश दिया था।


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