CHENNAI.चेन्नई: मातृत्व अवकाश देने के लिए विवाह का अनिवार्य रूप से पंजीकरण होना जरूरी नहीं है, मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा और विवाह पंजीकृत न होने के आधार पर मातृत्व अवकाश देने से इनकार करने वाले न्यायालय के कर्मचारी को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। अब समय आ गया है कि न्यायिक अधिकारी खुद को सुधारें और चीजों के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएं, क्योंकि आज के समय में सर्वोच्च न्यायालय ने भी लिव इन रिलेशनशिप को मान्यता दे दी है। न्यायमूर्ति आर सुब्रमण्यन और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने कहा कि कोडावसल के जिला मुंसिफ सह न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा मातृत्व अवकाश आवेदन को इसलिए खारिज करना कि आवेदक अपनी शादी से पहले ही गर्भवती हो गई थी, अमानवीय और पूरी तरह से अनुचित है। न्यायाधीश ने लिखा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि मातृत्व अवकाश केवल विवाहित महिला द्वारा ही लिया जा सकता है, लेकिन नियोक्ता से विवाह के तथ्य के बारे में संदेह से परे सबूत मांगने की अपेक्षा नहीं की जाती है।" हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज, तिरुवरुर को आवेदक को मातृत्व अवकाश देने का निर्देश दिया, मातृत्व अवधि के दौरान उसके द्वारा ली गई किसी भी छुट्टी को मातृत्व अवकाश माना जाना चाहिए और उसे उन दिनों के लिए भी भुगतान किया जाना चाहिए, हाईकोर्ट ने आदेश दिया।
इसके अलावा, जज ने रजिस्ट्री को आवेदक को हुई मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे के रूप में 1 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया और चार सप्ताह के भीतर मुआवजा दिया जाना चाहिए, जज ने आदेश दिया। जिला मुंसिफ सह न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट, कोडवासल में कार्यालय सहायक के रूप में कार्यरत आवेदक बी कविता ने मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया, जिसे न्यायिक मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दिया और प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज, तिरुवरुर ने इसे बरकरार रखा। आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि उसकी शादी पंजीकृत नहीं थी और वह शादी से पहले गर्भवती हो गई थी। आवेदक कविता ने 2020 में अपने पति को खो दिया, बाद में उसने अपनी दोस्त भारती के साथ अंतरंग संबंध बनाए। उनके रिश्ते से वह गर्भवती हो गई, इस बीच, भारती ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया। इसलिए, उसने उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया। इसके बाद, दोनों के परिवार के सदस्यों ने उनकी शादी की रस्म अदा की और अप्रैल 2024 को एक मंदिर में उनकी शादी हुई। इन सभी तथ्यों पर विचार किए बिना जिला मुंसिफ सह न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उनके मातृत्व अवकाश के आवेदन को खारिज कर दिया।
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