चेन्नई : तमिलनाडु बिजली बोर्ड ने उन खबरों का सख्त खंडन किया है, जिनमें दावा किया गया था कि किसानों को कृषि पंप सेटों के लिए प्रतिदिन दी जाने वाली 18 घंटे की मुफ्त थ्री-फेज़ बिजली आपूर्ति को घटाकर 14 घंटे कर दिया गया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि ऐसी खबरें पूरी तरह भ्रामक और निराधार हैं तथा राज्य सरकार की मौजूदा योजना में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है।
बिजली बोर्ड ने शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि किसानों को पहले की तरह ही प्रतिदिन 18 घंटे मुफ्त थ्री-फेज़ बिजली उपलब्ध कराई जा रही है और यह व्यवस्था बिना किसी परिवर्तन के जारी रहेगी। बोर्ड ने किसानों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से प्रसारित होने वाली अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें तथा केवल विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी को ही सही मानें।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि हाल के दिनों में कुछ माध्यमों में यह समाचार प्रसारित हुआ कि कृषि पंप सेटों को मिलने वाली मुफ्त बिजली की अवधि 18 घंटे से घटाकर 14 घंटे कर दी गई है। इन खबरों के सामने आने के बाद किसानों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई और कई स्थानों पर इस संबंध में सवाल उठाए गए। इसे देखते हुए बिजली बोर्ड ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक बयान जारी किया।
बोर्ड ने कहा कि तमिलनाडु सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और कृषि क्षेत्र को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। राज्य में कृषि सिंचाई के लिए बड़ी संख्या में किसान विद्युत चालित पंप सेटों का उपयोग करते हैं। ऐसे में उन्हें पर्याप्त समय तक बिजली उपलब्ध कराना खेती की उत्पादकता और सिंचाई व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से मुफ्त थ्री-फेज़ बिजली की मौजूदा व्यवस्था जारी रखी गई है।
बिजली बोर्ड के अनुसार, कृषि क्षेत्र को बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से विद्युत वितरण प्रणाली की निगरानी की जाती है। जहां भी तकनीकी कारणों से बाधा उत्पन्न होती है, वहां मरम्मत और रखरखाव का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है ताकि किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। बोर्ड ने कहा कि बिजली आपूर्ति के संबंध में समय-समय पर आवश्यक तकनीकी सुधार किए जाते हैं, लेकिन इससे किसानों को मिलने वाली 18 घंटे की मुफ्त बिजली योजना पर कोई असर नहीं पड़ता।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध होना खेती की सफलता का महत्वपूर्ण आधार है। विशेष रूप से धान, गन्ना, केला, सब्जियों और अन्य सिंचित फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए नियमित बिजली आपूर्ति बेहद जरूरी होती है। ऐसे में बिजली आपूर्ति में कटौती की खबरों से किसानों के बीच स्वाभाविक रूप से चिंता पैदा हो जाती है। इसलिए विभाग द्वारा समय रहते स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक था।
बिजली बोर्ड ने यह भी कहा कि कुछ भ्रामक सूचनाएं बिना आधिकारिक पुष्टि के प्रसारित की जा रही हैं, जिससे किसानों में भ्रम फैल रहा है। विभाग ने मीडिया और आम लोगों से भी अपील की है कि बिजली आपूर्ति से संबंधित किसी भी सूचना को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य कर लें। इससे अनावश्यक अफवाहों और गलतफहमियों से बचा जा सकेगा।
राज्य सरकार लंबे समय से किसानों को विभिन्न प्रकार की सहायता योजनाएं उपलब्ध करा रही है, जिनमें कृषि पंप सेटों के लिए मुफ्त बिजली एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना का उद्देश्य किसानों की सिंचाई लागत कम करना और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि कृषि क्षेत्र को पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध कराकर किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।
किसान संगठनों ने भी बिजली बोर्ड की इस स्पष्टता का स्वागत किया है। उनका कहना है कि आधिकारिक बयान से किसानों के बीच फैली भ्रम की स्थिति दूर होगी। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि भविष्य में यदि बिजली आपूर्ति से संबंधित कोई तकनीकी परिवर्तन किया जाए तो उसकी जानकारी समय रहते किसानों तक पहुंचाई जाए, ताकि वे अपनी सिंचाई और खेती की योजना उसी के अनुरूप बना सकें।
फिलहाल बिजली बोर्ड ने दोहराया है कि कृषि पंप सेटों के लिए प्रतिदिन 18 घंटे मुफ्त थ्री-फेज़ बिजली आपूर्ति की व्यवस्था यथावत जारी है। बोर्ड ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या अपुष्ट सूचना पर भरोसा न करें और बिजली आपूर्ति संबंधी जानकारी के लिए केवल विभाग के आधिकारिक वक्तव्यों और सूचना माध्यमों पर ही विश्वास करें।