चेन्नई : तमिलनाडु में किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। तमिलनाडु किसान संघ संयुक्त आंदोलन के अध्यक्ष कावेरी धनपालन के नेतृत्व में 40 से अधिक पदाधिकारियों ने डीएमके नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से मुलाकात की। चेन्नई स्थित डीएमके मुख्यालय अन्ना अरिवलयम में हुई इस बैठक में राज्य के किसानों की प्रमुख समस्याओं, कावेरी नदी से जुड़े विवादों और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान किसान प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से मेकेदातु बांध परियोजना का मुद्दा उठाया। उन्होंने कावेरी नदी के जल बंटवारे से जुड़े तमिलनाडु के हितों और किसानों की चिंताओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। किसान नेताओं ने कहा कि कावेरी डेल्टा क्षेत्र की खेती पूरी तरह नदी के पानी पर निर्भर है, इसलिए जल संसाधनों से जुड़े किसी भी निर्णय का सीधा प्रभाव किसानों के जीवन और कृषि उत्पादन पर पड़ता है।
किसान प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि डेल्टा जिलों में किसान कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इनमें सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता, खेती की बढ़ती लागत, फसलों के उचित मूल्य और मौसम में बदलाव के कारण होने वाला नुकसान प्रमुख हैं। उन्होंने सरकार से किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
बैठक में कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। किसान नेताओं का कहना था कि तमिलनाडु का डेल्टा क्षेत्र राज्य के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में किसान धान सहित अन्य फसलों की खेती करते हैं। लेकिन पानी की अनिश्चित उपलब्धता और बदलते मौसम के कारण खेती करना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सामने पूरे तमिलनाडु में कृषि क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं को भी रखा। किसानों ने कृषि उत्पादन बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल बीमा व्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को बाजार में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
बैठक के दौरान किसान नेताओं ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस नीतियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन से संभव है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि किसानों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए कृषि नीतियां तैयार की जाएं और स्थानीय स्तर पर आने वाली परेशानियों का समाधान जल्द किया जाए।
किसान प्रतिनिधियों की इस मुलाकात को राज्य की कृषि राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कावेरी जल विवाद और मेकेदातु बांध का मुद्दा तमिलनाडु में लंबे समय से संवेदनशील विषय रहा है। राज्य के किसान संगठन लगातार यह मांग करते रहे हैं कि कावेरी नदी के पानी से जुड़े मामलों में तमिलनाडु के किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
बैठक के बाद किसान नेताओं ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेंगे और किसानों के हित में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार और किसान संगठनों के बीच संवाद बना रहना जरूरी है, ताकि कृषि क्षेत्र की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
कावेरी धनपालन ने कहा कि किसान राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए दीर्घकालिक योजनाएं तैयार की जाएं। साथ ही उन्होंने जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री से यह मुलाकात कई मायनों में महत्वपूर्ण है। तमिलनाडु में कृषि और जल से जुड़े मुद्दे हमेशा राजनीतिक रूप से अहम रहे हैं। ऐसे में किसान नेताओं के साथ बातचीत सरकार और किसानों के बीच बेहतर समन्वय बनाने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है।
बैठक में किसान प्रतिनिधियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे राज्य के विकास के साथ-साथ कृषि क्षेत्र की मजबूती चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि किसानों को पर्याप्त पानी, उचित मूल्य और आवश्यक सुविधाएं मिलें तो राज्य की कृषि व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सकती है।
कुल मिलाकर, कावेरी धनपालन के नेतृत्व में किसान नेताओं की मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से हुई मुलाकात में मेकेदातु बांध, डेल्टा क्षेत्र की समस्याओं और राज्यभर के किसानों के मुद्दों पर चर्चा हुई। अब किसान संगठनों की नजर सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर है। किसानों को उम्मीद है कि बैठक में उठाए गए मुद्दों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई होगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।