चेन्नई: DMK अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने सोमवार को पट्टिनापक्कम में नया सचिवालय बनाने के सरकारी प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रोजेक्ट से मछुआरा समुदायों की आजीविका पर असर पड़ेगा। एक बयान में उन्होंने कहा कि DMK मछुआरों के साथ खड़ी रहेगी और सरकार के फैसले को वापस लेने तक उनके विरोध का समर्थन करेगी। उन्होंने बताया कि TVK सरकार का समर्थन करने वाली दो कम्युनिस्ट पार्टियों ने भी इस प्रोजेक्ट का विरोध किया है।

स्टालिन ने कहा, "सिर्फ एक व्यक्ति की इच्छा के लिए हजारों मछुआरों को उनकी आजीविका से वंचित नहीं किया जा सकता।" उन्होंने उन खबरों का ज़िक्र किया जिनमें कहा गया था कि पट्टिनापक्कम की जगह इसलिए चुनी गई क्योंकि एक ज्योतिषी ने सलाह दी थी कि मुख्यमंत्री का कार्यालय समुद्र की ओर होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसी कई जगहें हैं जहाँ नया सचिवालय बनाया जा सकता है, जिसमें ओमंदुरार सरकारी एस्टेट भी शामिल है, जिसे करुणानिधि के कार्यकाल में बनाया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार वहाँ चल रहे अस्पताल को दूसरी जगह ले जाने पर विचार कर सकती है और उस जगह का इस्तेमाल सचिवालय के तौर पर किया जा सकता है।

 पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे आरोप लगाया कि TVK मंत्री दावा कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट पर कोई फैसला नहीं लिया है और सिर्फ़ एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट मांगी गई है। इसे गुमराह करने वाला बताते हुए उन्होंने सवाल किया कि सरकारी आदेश जारी करने के बाद सरकार यह कैसे कह सकती है कि कोई फैसला नहीं लिया गया है।

उन्होंने दावा किया कि 1,200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से उस जगह पर सचिवालय बनाने के लिए एक सरकारी आदेश (G.O.) जारी किया गया है, जबकि इस इलाके को पहले मछुआरों के लिए हाउसिंग स्कीम के तौर पर देखा गया था।  

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