मदुरै में मानसून से पहले नहरों की सफाई और चौड़ीकरण की मांग तेज

Update: 2026-07-13 03:42 GMT

Tamil Nadu तमिलनाडु: मदुरै शहर में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से निपटने के लिए स्थानीय लोगों ने नगर निगम प्रशासन से नहरों की सफाई और चौड़ीकरण की मांग की है। शहरवासियों का कहना है कि अगर समय रहते नहरों और बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो आगामी मानसून में कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है।

लोगों का कहना है कि मदुरै शहर में बारिश के पानी की निकासी के लिए कई प्रमुख नहरें मौजूद हैं, लेकिन उचित रखरखाव के अभाव में इनमें पानी का बहाव बाधित हो रहा है। कई नहरें गाद, कचरे और आसपास के रिहायशी इलाकों से निकलने वाले सीवेज से भर चुकी हैं। इसके कारण न केवल बारिश के समय पानी की निकासी प्रभावित होती है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडराता रहता है।

मदुरै में कुल 16 प्रमुख नहरें हैं, जिनका इस्तेमाल मानसून के मौसम में शहर के विभिन्न इलाकों से बारिश के पानी को बाहर निकालने के लिए किया जाता है। इनमें कृथुमल नहर, पंडलगुडी नहर, पनयूर नहर और चिंतामणि नहर समेत कई अन्य नहरें शामिल हैं। इन नहरों के जरिए बारिश का पानी शहर के निचले इलाकों से निकलकर आगे बढ़ता है और कई स्थानों पर इसे वैगई नदी तक पहुंचाया जाता है।

इसके अलावा मदुरै नगर निगम क्षेत्र में कई छोटे-बड़े बारिश के पानी के नाले भी मौजूद हैं, जो शहर के अलग-अलग हिस्सों से पानी को बाहर निकालने का काम करते हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन नालों और नहरों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण इनकी क्षमता लगातार कम होती जा रही है।

शहरवासियों ने बताया कि कई नहरों में आसपास के घरों और इलाकों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे पहुंच रहा है। इसके कारण नहरों में गंदगी जमा हो रही है और पानी का प्रवाह रुक रहा है। जगह-जगह कचरा जमा होने से नहरें संकरी हो गई हैं। बारिश के समय जब पानी का दबाव बढ़ता है तो यही रुकावटें जलभराव का कारण बनती हैं।

लोगों का कहना है कि नहरों में जमा कचरे और गंदगी से बदबू की समस्या भी बढ़ रही है। इसके साथ ही मच्छरों और अन्य कीटों का प्रकोप बढ़ने से आसपास रहने वाले लोगों में बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है। खासकर मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।

तमिलनाडु में दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय हो चुका है और आने वाले कुछ महीनों में उत्तर-पूर्व मानसून भी दस्तक देने वाला है। उत्तर-पूर्व मानसून के दौरान राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश होती है। ऐसे में मदुरै शहर में जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

स्थानीय लोगों ने मदुरै नगर निगम प्रशासन, जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों से अपील की है कि मानसून शुरू होने से पहले सभी नहरों और बारिश के पानी के नालों की विशेष सफाई कराई जाए। लोगों ने मांग की है कि केवल सफाई ही नहीं, बल्कि लंबे समय के समाधान के लिए नहरों का चौड़ीकरण और गहरीकरण भी किया जाना चाहिए।

नागरिकों का कहना है कि नहरों की क्षमता बढ़ाने से बारिश के समय पानी तेजी से बाहर निकल सकेगा और शहर के इलाकों में जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। इसके अलावा नहरों के आसपास अवैध कचरा फेंकने और सीवेज छोड़ने पर भी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

बताया जा रहा है कि कृथुमल और पंडलगुडी जैसी कई प्रमुख नहरें जल संसाधन विभाग (Water Resources Department) के नियंत्रण में आती हैं। ऐसे में नगर निगम और संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है ताकि सफाई और रखरखाव का काम समय पर पूरा किया जा सके।

शहरवासियों ने कहा कि मदुरै जैसे ऐतिहासिक और तेजी से विकसित हो रहे शहर के लिए मजबूत जल निकासी व्यवस्था बेहद जरूरी है। हर साल बारिश के दौरान सामने आने वाली समस्याओं को देखते हुए स्थायी समाधान की दिशा में काम किया जाना चाहिए।

अब सभी की नजरें मदुरै नगर निगम और संबंधित विभागों पर हैं कि वे मानसून से पहले नहरों की सफाई, मरम्मत और चौड़ीकरण के लिए क्या कदम उठाते हैं। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन समय रहते कार्रवाई करेगा ताकि बारिश के मौसम में शहरवासियों को जलभराव और गंदगी की समस्या से राहत मिल सके।

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