मदुरै : 29 अक्टूबर 2026। तमिलनाडु की राजनीति में बिजली कटौती को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कषगम (TVK) सरकार पर तीखा हमला बोला है। मदुरै के प्रसिद्ध श्री मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के दौरान बिजली गुल होने से नाराज पलानीस्वामी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में लोग न तो शांति से रह पा रहे हैं और न ही भगवान की पूजा शांति से कर पा रहे हैं। उनके इस बयान के बाद राज्य में बिजली आपूर्ति और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
मीनाक्षी मंदिर में पूजा के दौरान अचानक चली गई बिजली
जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पाडी पलानीस्वामी गुरुवार को मदुरै स्थित प्रसिद्ध श्री मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। बताया गया कि करीब 10 मिनट से अधिक समय तक मंदिर के कुछ हिस्सों में अंधेरा छाया रहा।बिजली कटौती के कारण मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं को भी असुविधा का सामना करना पड़ा। इसी घटना को लेकर पलानीस्वामी ने राज्य सरकार की आलोचना की और बिजली आपूर्ति की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने में नाकाम साबित हो रही है। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों पर भी बिजली आपूर्ति बाधित होना प्रशासनिक व्यवस्था की स्थिति को दर्शाता है।हालांकि, मंदिर में बिजली कटौती के वास्तविक कारण और तकनीकी खराबी से संबंधित विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
'न शांति से जी सकते हैं, न भगवान की पूजा कर सकते हैं'
मंदिर में बिजली गुल होने के बाद पलानीस्वामी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब वह देवी मीनाक्षी की पूजा कर रहे थे, उसी दौरान बिजली चली गई।उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थल पर भी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो सामान्य नागरिकों की परेशानियों का समाधान कैसे किया जाएगा।पलानीस्वामी ने इस घटना को राज्य में बिजली संकट का उदाहरण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को बार-बार बिजली कटौती की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन सरकार स्थिति सुधारने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है।उनका कहना था कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा के बाधित होने का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि धार्मिक गतिविधियों, व्यापार, उद्योग और आम जनजीवन पर भी पड़ता है।
छह महीने की सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप
इससे पहले मदुरै में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली TVK सरकार के करीब छह महीने के कार्यकाल पर सवाल उठाए थे।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के कार्यकाल में प्रशासनिक निष्क्रियता बढ़ी है और बिजली आपूर्ति व्यवस्था लगातार खराब हुई है।ईपीएस के अनुसार, बिजली संकट का स्थायी समाधान निकालने के बजाय सरकार विभिन्न कारण बताकर अपनी जिम्मेदारियों से बचने का प्रयास कर रही है।उन्होंने कहा कि राज्य के नागरिकों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। इसके लिए बिजली उत्पादन, वितरण और खरीद की बेहतर योजना तैयार करने की आवश्यकता है।पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री और बिजली विभाग से जनता की परेशानियों का संज्ञान लेने तथा बिजली आपूर्ति सुधारने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
महंगी बिजली खरीद को लेकर भी उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु सरकार की बिजली खरीद नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली मंत्री निर्मल कुमार ने भ्रष्टाचार का हवाला देते हुए 20 रुपये प्रति यूनिट वाले पुराने बिजली खरीद समझौते को रद्द कर दिया, लेकिन उसकी जगह वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।पलानीस्वामी का आरोप है कि इसी निर्णय के कारण राज्य में बिजली की कृत्रिम कमी पैदा हुई।उन्होंने दावा किया कि सरकार ने बाद में 37.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदने की योजना बनाई और इसके बाद 41.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीद का प्रस्ताव भी सामने आया।उनके अनुसार, 41.50 रुपये प्रति यूनिट वाला प्रस्ताव सार्वजनिक और राजनीतिक विरोध के बाद वापस लेना पड़ा।हालांकि, बिजली खरीद की इन दरों, अनुबंधों और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर पलानीस्वामी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इन आरोपों को किसी जांच एजेंसी या न्यायिक संस्था का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
जयललिता सरकार के कार्यकाल की दिलाई याद
ईपीएस ने पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वर्ष 2011 में सत्ता संभालने के बाद AIADMK सरकार ने तीन वर्षों के भीतर तमिलनाडु को बिजली की पर्याप्त उपलब्धता वाला राज्य बना दिया था।उन्होंने कहा कि उस समय बिजली खरीद की लागत लगभग 4.75 रुपये से 5.50 रुपये प्रति यूनिट के बीच रखी गई थी।पलानीस्वामी ने मौजूदा सरकार से सवाल किया कि आधुनिक तकनीक और संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद बिजली आपूर्ति में व्यवधान क्यों आ रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की गलत नीतियों का आर्थिक बोझ अंततः आम जनता पर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री से मांगी जवाबदेही
बिजली संकट को लेकर पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री विजय और बिजली मंत्री निर्मल कुमार से जवाबदेही तय करने की मांग की है।उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली खरीद से संबंधित फैसलों में पारदर्शिता का अभाव है और सरकार को सार्वजनिक धन के उपयोग का स्पष्ट हिसाब देना चाहिए।पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली खरीद की लागत और आपूर्ति संबंधी निर्णयों का सीधा असर राज्य की वित्तीय स्थिति पर पड़ता है। ऐसे में प्रत्येक निर्णय उचित योजना और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।उन्होंने इस मामले में आवश्यक स्पष्टीकरण देने और बिजली आपूर्ति की समस्या दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।
बिजली कटौती पर लगातार सरकार को घेर रही AIADMK
तमिलनाडु में बिजली कटौती का मुद्दा पिछले कई महीनों से विपक्ष के राजनीतिक विरोध का प्रमुख विषय बना हुआ है।इससे पहले भी पलानीस्वामी ने आरोप लगाया था कि बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण घरेलू उपभोक्ता, छोटे उद्योग, किसान और विद्यार्थी प्रभावित हो रहे हैं।जून 2026 में उन्होंने सरकार से जिलावार बिजली की मांग, उत्पादन और खरीद के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि बिजली की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए सरकार को पहले से पर्याप्त तैयारी करनी चाहिए।
बिजली संकट पर राजनीतिक टकराव तेज
मीनाक्षी मंदिर में बिजली कटौती की घटना ने राज्य की बिजली व्यवस्था को लेकर जारी राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है।विपक्ष जहां बार-बार बिजली गुल होने की घटनाओं को प्रशासनिक विफलता का संकेत बता रहा है, वहीं इन आरोपों की वास्तविक स्थिति का आकलन बिजली विभाग के आधिकारिक आंकड़ों, आपूर्ति रिकॉर्ड और सरकार के स्पष्टीकरण के आधार पर किया जाना जरूरी है।फिलहाल मंदिर में बिजली कटौती की घटना पर पलानीस्वामी की प्रतिक्रिया राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस घटना और बिजली खरीद से जुड़े आरोपों पर क्या जवाब देती है तथा भविष्य में बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं।
Tags: