Tamil Nadu तमिलनाडु: टेक्नोलॉजी आधारित ट्रैफिक प्रबंधन की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। चेन्नई मेट्रोपॉलिटन एरिया में इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS) प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए 500 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी दी गई है। इस परियोजना का उद्देश्य शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को आधुनिक तकनीक की मदद से नियंत्रित करना है।
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन के सूत्रों ने गुरुवार को जानकारी दी कि चेन्नई इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (CITS) प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य एक ऐसा कुशल और तकनीक-सक्षम ट्रैफिक सिस्टम विकसित करना है, जो राजधानी शहर की तेजी से बढ़ती यातायात आवश्यकताओं को संभाल सके।
अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के तहत शहर में ट्रैफिक मॉनिटरिंग, सिग्नल कंट्रोल, रियल टाइम डेटा एनालिसिस और स्मार्ट कैमरा नेटवर्क जैसी आधुनिक सुविधाओं को शामिल किया जाएगा। इससे न केवल ट्रैफिक जाम को कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि सड़क सुरक्षा को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।
सूत्रों का कहना है कि चेन्नई में लगातार बढ़ती वाहनों की संख्या और शहरीकरण के कारण ट्रैफिक दबाव काफी बढ़ गया है। इसी को देखते हुए यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया है, ताकि यातायात व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सके।
CITS प्रोजेक्ट के तहत शहर के प्रमुख चौराहों और मुख्य सड़कों पर स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल लगाए जाएंगे, जो वाहनों की वास्तविक स्थिति के अनुसार अपने आप समय समायोजित कर सकेंगे। इसके अलावा, ट्रैफिक उल्लंघनों की निगरानी के लिए एआई आधारित कैमरा सिस्टम भी लगाया जाएगा।
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन ने बताया कि इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा डेटा सेंटर और कंट्रोल रूम की स्थापना भी होगा, जहां पूरे शहर के ट्रैफिक की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन को तुरंत निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीक आधारित प्रणाली से न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी, बल्कि ईंधन की खपत और वायु प्रदूषण में भी कमी आने की संभावना है। यह प्रोजेक्ट शहर को स्मार्ट सिटी मॉडल की ओर आगे ले जाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को भी डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिससे बसों और अन्य वाहनों की ट्रैकिंग आसान हो सकेगी। यात्रियों को रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
सूत्रों ने बताया कि प्रोजेक्ट को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और पहले चरण में सबसे अधिक ट्रैफिक वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद पूरे महानगर क्षेत्र में इसका विस्तार किया जाएगा।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना के लागू होने से चेन्नई में ट्रैफिक प्रबंधन एक नए स्तर पर पहुंच जाएगा और नागरिकों को जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल, प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और जल्द ही इसके तकनीकी ढांचे और साझेदार एजेंसियों की भूमिका को अंतिम रूप दिया जाएगा।