वेल्लोर: 120 दलित परिवारों को तत्कालीन आदि द्रविड़ कल्याण (ADW) विभाग ने घर बनाने के लिए ज़मीन के पट्टे दिए थे, जिसके बाद उन्होंने ज़िले के चिन्ना अल्लापुरम में अंबेडकर नगर को अपना घर बनाया। इस बात को 33 साल बीत चुके हैं, लेकिन वे अभी भी अनिश्चितता का जीवन जी रहे हैं क्योंकि उनकी शिकायत है कि ज़मीन के रिकॉर्ड में अभी तक उनके नाम अपडेट नहीं किए गए हैं। ज़मीन के मालिकाना हक पर कोर्ट के फैसले के बाद बनी इस स्थिति के लिए अधिकारियों की लापरवाही को ज़िम्मेदार ठहराते हुए, निवासी सरकार से मांग कर रहे हैं कि वह अपने आवंटन का सम्मान करे और उन्हें ई-पट्टे दे।
1993 में, कास्पा में मरियम्मन मंदिर स्ट्रीट पर रहने वाले अरुंथथियार समुदाय के 120 परिवारों को ADW विभाग (जिसे अब सामाजिक न्याय विभाग के नाम से जाना जाता है) ने तत्कालीन अल्लापुरम में ज़मीन के एक हिस्से में 120 वर्ग मीटर के पट्टे आवंटित किए थे। चिन्ना अल्लापुरम का अंबेडकर नगर सर्किट हाउस के पीछे स्थित है।
हालांकि राजस्व विभाग ने ADW विभाग के आवंटन पर आगे की कार्रवाई नहीं की थी, जैसे कि ज़मीन का उप-विभाजन करना और 120 लाभार्थियों को पट्टे जारी करना, लेकिन 1994 में ज़मीन आवंटन के खिलाफ़ मूल ज़मीन मालिकों में से एक ने कोर्ट में मामला दायर कर दिया। 1995 में, ज़िला अदालत ने याचिकाकर्ता के पक्ष में एकतरफ़ा फैसला सुनाया, क्योंकि प्रतिवादियों—विशेष तहसीलदार और ज़िला कलेक्टर—ने न तो सुनवाई के लिए उपस्थिति दर्ज कराई और न ही लिखित बयान दाखिल किए। सूत्रों के अनुसार, अदालत ने प्रतिवादियों के खिलाफ़ स्थायी निषेधाज्ञा जारी की थी।