मदुरै: पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने शनिवार को केंद्र सरकार पर संसदीय लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मॉनसून सत्र के दौरान पास किए गए 12 बिलों में से किसी पर भी पर्याप्त बहस नहीं हुई।
मदुरै में कांग्रेस की ओर से आयोजित 'संसद में क्या हुआ?' (What Happened in Parliament?) नाम की जनसभा में बोलते हुए चिदंबरम ने कहा कि तमिलनाडु विधानसभा संसद से बेहतर काम कर रही है, जबकि संसद में विपक्ष के नेताओं और सांसदों को बोलने के लिए पर्याप्त मौके नहीं दिए गए।
प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित तरीकों को रोकने के लिए लाए गए कानून की आलोचना करते हुए चिदंबरम ने इसे "घोड़े के भाग जाने के बाद अस्तबल में ताला लगाने" जैसा बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून उल्लंघन के बाद सजा देने पर ज़्यादा ज़ोर देता है, न कि रोकथाम के उपायों पर।
प्रस्तावित परिसीमन (सीटों के पुनर्निर्धारण) की प्रक्रिया पर चिदंबरम ने कहा कि तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों में से कोई भी सीट कम नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन पर संवैधानिक रोक, जो 1976 में लगाई गई थी और बाद में बढ़ाई गई थी, 2026 में खत्म होने वाली है।