चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट ने अन्नामलाई यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस-चांसलर एम. रामनाथन और पूर्व रजिस्ट्रार एम. रथिनासबपति को भ्रष्टाचार के चार मामलों से बरी कर दिया है। ये मामले 2008 और 2010 के बीच यूनिवर्सिटी में सिविल कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्ट देने में हुई गड़बड़ियों से जुड़े थे।
ये मामले अप्रैल 2013 में DVAC द्वारा दर्ज FIR से शुरू हुए थे, जिसकी चार्जशीट दिसंबर 2018 में दाखिल की गई थी। एजेंसी का आरोप था कि रामनाथन और रथिनासबपति ने तय सीमा से ज़्यादा रकम पर कॉन्ट्रैक्ट देकर टेंडर नियमों और सरकारी आदेशों का उल्लंघन किया, जिससे यूनिवर्सिटी को आर्थिक नुकसान हुआ। कुड्डालोर की ट्रायल कोर्ट द्वारा इन मामलों से बरी करने की उनकी याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद आरोपी हाई कोर्ट पहुंचे थे।
अपने आदेश में, हाई कोर्ट ने कहा कि DVAC ने 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) के तहत ज़रूरी मंज़ूरी नहीं ली थी, क्योंकि चार्जशीट जुलाई 2018 में अधिनियम में संशोधन लागू होने के बाद दाखिल की गई थी। चूंकि ट्रायल कोर्ट ने संशोधन के बाद मामलों का संज्ञान लिया था, इसलिए हाई कोर्ट ने माना कि पहले से मंज़ूरी लेना ज़रूरी था।
कोर्ट ने यह भी पाया कि उपलब्ध सामग्री से 'आपराधिक विश्वासघात' (criminal breach of trust) के बुनियादी तत्व साबित नहीं होते, जिसमें यूनिवर्सिटी की संपत्ति का बेईमानी से गबन या उसे अपने इस्तेमाल में लेना शामिल है। कोर्ट ने गौर किया कि कॉन्ट्रैक्ट पर यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग कमेटी ने विचार किया था और सिंडिकेट ने मंज़ूरी दी थी, और रजिस्ट्रार के पास कॉन्ट्रैक्ट देने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं था।