मद्रास हाई कोर्ट ने गवाहों की सुरक्षा से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान स्पेशल कोर्ट के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाने का निर्देश दिया है।
जस्टिस अनीता सुमंत और सुंदर मोहन की डिवीजन बेंच ने एमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) एडवोकेट शरथ चंद्रन को SOP तैयार करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा, "UAPA की धारा 44 के तहत दिया गया आदेश किसी भी तरह से अंतिम नहीं होता है, बल्कि कोर्ट द्वारा उस पर दोबारा विचार (रिविजन) किया जा सकता है - चाहे कोर्ट खुद ऐसा करे या गवाह/पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के कहने पर - और ऐसा परिस्थितियों में बदलाव, खतरे की गंभीरता और अन्य पैमानों के आधार पर किया जा सकता है।"
यह आदेश हाल ही में चार लोगों द्वारा दायर याचिका पर दिया गया। इन चार लोगों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े सैयद अबू ताहिर भी शामिल हैं, जिन पर 2016 में कोयंबटूर में हिंदू मुन्नानी नेता की हत्या का आरोप है। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट आई अब्दुल बासित पेश हुए।