सिक्किम का बड़ा कदम अब स्थानीय भाषाओं में AI तकनीक को मिलेगा बढ़ावा
भाषिनी वर्कशॉप के जरिए सिक्किम में तैयार होगा भाषा आधारित AI सिस्टम
गंगटोक: सिक्किम ने स्थानीय भाषाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'भाषिनी' (Bhashini) वर्कशॉप के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित पहल की शुरुआत की है। इस परियोजना का लक्ष्य क्षेत्रीय भाषाओं को AI तकनीक से जोड़ना और आम लोगों के लिए डिजिटल सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना है।
कार्यशाला में भाषा विशेषज्ञों, तकनीकी विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसमें स्थानीय भाषाओं के डेटा संग्रह, अनुवाद तकनीक, वॉइस रिकग्निशन और AI मॉडल के विकास जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
'भाषिनी' भारत सरकार की एक डिजिटल भाषा पहल है, जिसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं में AI आधारित सेवाओं को विकसित करना है। इसके जरिए अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद, आवाज पहचान और डिजिटल संवाद को आसान बनाने पर काम किया जा रहा है।
सिक्किम में इस पहल को खास महत्व दिया जा रहा है क्योंकि राज्य में कई स्थानीय भाषाएं और बोलियां प्रचलित हैं। AI तकनीक के माध्यम से इन भाषाओं को संरक्षित करने, दस्तावेज तैयार करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि स्थानीय भाषाओं के लिए बेहतर AI सिस्टम तैयार करने के लिए गुणवत्तापूर्ण भाषा डेटा की जरूरत होती है। इसके लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी।
इस पहल से शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और सरकारी सेवाओं के क्षेत्र में स्थानीय भाषा आधारित डिजिटल समाधान विकसित किए जा सकेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अपनी भाषा में तकनीकी सुविधाओं तक पहुंच मिलने की उम्मीद है।
सिक्किम सरकार का मानना है कि AI और स्थानीय भाषाओं का मेल राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ डिजिटल समावेशन को भी मजबूत करेगा।
'भाषिनी' वर्कशॉप को राज्य में भाषा और तकनीक के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इससे स्थानीय भाषाओं के लिए नए AI टूल विकसित होने की संभावना है।