सिक्किम को शामिल करने की खबरों पर महेंद्र लामा का बड़ा बयान
सिक्किम पर गोरखालैंड विवाद
दार्जिलिंग: गोरखालैंड आंदोलन से जुड़े प्रस्तावित रोडमैप में सिक्किम को शामिल किए जाने के दावे पर विवाद के बीच वरिष्ठ शिक्षाविद और राजनीतिक विश्लेषक महेंद्र पी. लामा ने सफाई दी है। उन्होंने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि गोरखालैंड से संबंधित किसी भी रोडमैप में सिक्किम को शामिल करने की बात नहीं है।
लामा ने स्पष्ट किया कि गोरखालैंड का मुद्दा मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग पहाड़ी क्षेत्र और इससे जुड़े प्रशासनिक, राजनीतिक तथा विकास संबंधी विषयों से संबंधित है। उन्होंने कहा कि सिक्किम एक अलग राज्य है और उसे किसी भी प्रस्ताव या रोडमैप में शामिल करने की बात तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक चर्चाओं में यह दावा किया गया था कि गोरखालैंड के लिए तैयार किए जा रहे किसी रोडमैप में सिक्किम के कुछ हिस्सों को भी जोड़ा जा सकता है। इस दावे के बाद सिक्किम और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा शुरू हो गई थी। महेंद्र लामा ने इसी संदर्भ में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने कहा कि गोरखालैंड की मांग ऐतिहासिक रूप से दार्जिलिंग क्षेत्र की पहचान, प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ी रही है। इस मुद्दे पर कई दौर की राजनीतिक बातचीत और आंदोलन हो चुके हैं, लेकिन इसमें सिक्किम को जोड़ने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
गोरखालैंड की मांग लंबे समय से पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाकों में एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा रही है। अलग प्रशासनिक व्यवस्था की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों ने समय-समय पर आंदोलन किए हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच भी इस विषय पर बातचीत होती रही है।
महेंद्र लामा ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर गलत सूचनाएं फैलने से अनावश्यक भ्रम पैदा होता है। उन्होंने तथ्यों के आधार पर चर्चा करने की अपील की और कहा कि किसी भी राजनीतिक प्रस्ताव को उसके वास्तविक दस्तावेजों और आधिकारिक बयानों के आधार पर समझना चाहिए।
सिक्किम को लेकर उठी चर्चा के बाद वहां भी लोगों और राजनीतिक समूहों ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। हालांकि लामा के बयान के बाद यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई है कि गोरखालैंड रोडमैप और सिक्किम को जोड़ने वाली बात का कोई आधिकारिक आधार नहीं है।
फिलहाल गोरखालैंड से जुड़ी राजनीतिक प्रक्रिया और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर चर्चा जारी है। आने वाले समय में इस विषय पर सरकारों और संबंधित पक्षों के बीच बातचीत की दिशा पर नजर रहेगी।