गंगटोक: इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के छात्रों के एक समूह ने सिक्किम में ऑर्गेनिक खेती से जुड़े अपने अनुभव राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के साथ साझा किए। छात्रों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में जैविक कृषि व्यवस्था को करीब से समझने के बाद किसानों के अनुभव, खेती के तौर-तरीकों और ऑर्गेनिक मॉडल से जुड़े अपने निष्कर्षों पर राज्यपाल से चर्चा की।

सिक्किम को देश में जैविक खेती को व्यापक स्तर पर अपनाने वाले अग्रणी राज्य के रूप में जाना जाता है। ऐसे में छात्रों के इस अध्ययन ने उन्हें कृषि उत्पादन के साथ पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और टिकाऊ विकास के बीच संबंध को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर दिया।
किसानों से सीधे संवाद कर समझी खेती
अपने दौरे के दौरान ISB के छात्रों ने स्थानीय किसानों से बातचीत की और जैविक खेती की प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर समझा। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के विकल्प, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्थानीय कृषि पद्धतियों से संबंधित जानकारी जुटाई। छात्रों ने यह भी जानने का प्रयास किया कि ऑर्गेनिक खेती अपनाने के बाद किसानों के सामने बाजार, उत्पादन लागत, प्रमाणन और उपज की बिक्री जैसी कौन-कौन सी चुनौतियां आती हैं।
राज्यपाल से साझा किए अनुभव
राज्यपाल के साथ मुलाकात के दौरान छात्रों ने फील्ड विजिट के दौरान हासिल किए गए अनुभवों और सीख को साझा किया। बातचीत में जैविक खेती को आर्थिक रूप से अधिक टिकाऊ बनाने और किसानों की आय से जोड़ने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। छात्रों के लिए यह दौरा केवल अकादमिक अध्ययन तक सीमित नहीं रहा। उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि किसी बड़े कृषि मॉडल को लागू करने में सरकार, किसानों, बाजार और उपभोक्ताओं की भूमिका किस तरह एक-दूसरे से जुड़ी होती है।
सिक्किम का ऑर्गेनिक मॉडल बना अध्ययन का केंद्र
सिक्किम ने लंबे समय से जैविक खेती को अपनी कृषि नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। राज्य में खेती के दौरान प्राकृतिक और जैविक तरीकों को बढ़ावा देने के साथ रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम किया गया है। इसी मॉडल के कारण सिक्किम का अनुभव कृषि और प्रबंधन के छात्रों के लिए अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय बनता है। खासकर यह समझना उपयोगी है कि पर्यावरण के अनुकूल खेती को बाजार से जोड़कर किसानों के लिए आर्थिक अवसर कैसे तैयार किए जा सकते हैं।
टिकाऊ कृषि पर रहा फोकस
छात्रों की बातचीत में सस्टेनेबल एग्रीकल्चर यानी टिकाऊ कृषि का विषय प्रमुख रहा। पहाड़ी राज्यों में सीमित कृषि भूमि और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित इस्तेमाल बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऑर्गेनिक खेती मिट्टी के स्वास्थ्य, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी है। हालांकि इसके साथ किसानों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराना भी जरूरी होता है।
युवाओं को जमीनी अनुभव से जोड़ने की पहल
ISB जैसे संस्थान में प्रबंधन की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए किसानों के बीच जाकर कृषि व्यवस्था को समझना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों को जानने का अवसर है। इससे छात्र किताबों और कक्षाओं से बाहर निकलकर यह देख पाते हैं कि नीतियां जमीनी स्तर पर किस तरह काम करती हैं। राज्यपाल के साथ संवाद में छात्रों ने सिक्किम में बिताए समय और स्थानीय समुदायों से मिली सीख को महत्वपूर्ण अनुभव बताया। इस दौरान कृषि के साथ ग्रामीण उद्यमिता और स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग की संभावनाओं पर भी ध्यान गया।
ऑर्गेनिक खेती से बाजार जोड़ना बड़ी चुनौती
जैविक खेती को सफल बनाने के लिए केवल उत्पादन पर्याप्त नहीं है। किसानों को अपने उत्पादों के लिए स्थायी बाजार, बेहतर कीमत, परिवहन और मजबूत सप्लाई चेन की जरूरत होती है। विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में बाजार तक उत्पाद पहुंचाने की लागत बड़ी चुनौती बन सकती है। ऐसे में प्रबंधन संस्थानों के छात्रों का अध्ययन किसानों के उत्पादों की मार्केटिंग, वैल्यू एडिशन और ब्रांडिंग के नए मॉडल विकसित करने में उपयोगी साबित हो सकता है। ISB छात्रों की यह यात्रा शिक्षा, कृषि और जमीनी अनुभव को जोड़ने वाली पहल के रूप में सामने आई। राज्यपाल के साथ मुलाकात में छात्रों ने सिक्किम की ऑर्गेनिक खेती से मिली सीख साझा की और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को करीब से समझने के अपने अनुभव बताए।
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