गंगटोक: सिक्किम हाई कोर्ट ने राज्य में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाओं से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की है। अदालत ने भूस्खलन, बाढ़, बादल फटने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए प्रशासन की तैयारियों और आपदा प्रबंधन व्यवस्था की जानकारी ली।
सिक्किम हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील राज्य माना जाता है। हाल के वर्षों में भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाओं ने राज्य में आपदा प्रबंधन को लेकर चुनौतियां बढ़ाई हैं। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने संबंधित विभागों से आपदा से पहले की तैयारी, राहत और बचाव व्यवस्था, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली के बारे में जानकारी मांगी। अदालत ने अधिकारियों को प्रभावी समन्वय और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
अदालत ने यह भी देखा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में बदलाव आ रहा है, जिससे पहाड़ी राज्यों में जोखिम बढ़ रहा है। ऐसे में वैज्ञानिक अध्ययन, बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली और मजबूत बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पर चर्चा हुई। राज्य प्रशासन की ओर से आपदा प्रबंधन को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई। इसमें राहत दलों की तैनाती, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, सड़क संपर्क बहाली और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने जैसे उपाय शामिल हैं।
सिक्किम में वर्षा और भूस्खलन से सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसलिए प्रशासन लगातार जोखिम वाले इलाकों में निगरानी और सुरक्षा उपाय बढ़ाने पर काम कर रहा है।
हाई कोर्ट की समीक्षा का उद्देश्य राज्य में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और प्रभावी बनाना है। अदालत ने संबंधित विभागों को सुरक्षा और तैयारी से जुड़े मामलों में गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए हैं।
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